● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
इन दिनो तथाकथित मोदी-सरकार जिस तरह से अपने मनबढ़ चरित्र का परिचय देते हुए, विपक्षी दलों, विशेषत: काँग्रेस के पूर्व-अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ अवैधानिक तरीक़े से निबट रही है, उससे अब देश की बहुसंख्य जनता भी आक्रोशित हो चुकी है। इतना ही नहीं, भारतीय जनता पार्टी-सहित अन्य राजनीतिक दलों के राज्यों के नेता भी मोदी की सरकारी नीति से तंग आ चुके हैं, जिसके कारण वे काँग्रेस का हाथ थामने के लिए बाध्य कर दिये गये हैं।
‘भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस’ ने हरियाणा की राजनीति मे भूचाल ला दिया है। भारतीय जनता पार्टी, जे० जे० पी०, आइ० एन० एल० डी० तथा आम आदमी पार्टी के पूर्व-विधायकों-सहित ५६ नेताओं ने ‘काँग्रेस’ का दामन थाम लिया है। यद्यपि हरियाणा-विधानसभा का चुनाव अभी दूर है तथापि अभी और विधायक, पूर्व-विधायक तथा अन्य नेताओं के काँग्रेस मे शामिल होने का बाज़ार गरम हो चुका है। निकट भविष्य मे ‘पंचायती चुनाव’ मे इस बार काँग्रेस-वाम दल-गठबन्धन ‘खेला’ करने के लिए तत्पर दिख रहा है, जो कि तृणमूल काँग्रेस के लिए ख़तरे की घण्टी है। यह वही गठबन्धन है, जिसने हाल ही मे सम्पन्न सागरदीघी विधानसभा-उपचुनाव मे ‘खेला’ करते हुए, तृणमूल काँग्रेस के उम्मीदवार को पराजित कर दिया था।
पश्चिमबंगाल मे काँग्रेस-वाम दल-गठबन्धन का दिखता वर्चस्व
पिछले २५ मार्च को काँग्रेस-वाम दल-गठबन्धन ने पुरबा मेदिनीपुर जिले के हल्दिया ‘डॉक संस्थान प्रबन्धन-समिति’ के चुनाव’ मे १९ मे से १९ सीटें जीतकर तृणमूल काँग्रेस और भारतीय जनता पार्टी को हाशिये से भी उतार फेंका है। ज्ञातव्य है कि उस चुनाव मे ७३७ मतदाताओं मे से ६९४ मतदाताओं ने काँग्रेस-वाम, तृणमूल काँग्रेस व्यापार-संघ तथा भारतीय जनता पार्टी-समर्थित भारतीय मज़दूर-संघ के बीच त्रिकोणीय संघर्ष मे अपने मताधिकार का प्रयोग किया था, जिसमे काँग्रेस-वाम दल-गठबन्धन ने उक्त दोनो ही दलों का नामो निशाँ मिटाकर, अपना वर्चस्व स्थापित कर लिया है। उस चुनाव मे बन्दरगाह के स्थायी कर्मचारियों और अधिकारियों ने अपने-अपने मत का सदुपयोग किया था। पिछले २६ मार्च को कर्नाटक मे भारतीय जनता पार्टी के दो नेता और जनता दल के एक नेता काँग्रेस मे शामिल हो चुके थे। यह घटना उस समय की गयी है जिस समय कर्नाटक मे चुनावी वातावरण बनाया जा रहा है। सम्भावना है, कर्नाटक मे आगामी मई-माह मे चुनाव कराने की। यह वही कर्नाटक-राज्य है, जहाँ के निवासी और प्रखर नेता, काँग्रेस-अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे हैं। अभी वहाँ भारतीय जनता पार्टी से कई नेता अलग होकर काँग्रेस मे शामिल हो सकते हैं, इससे इन्कार नहीं किया जा सकता।
(सर्वाधिकार सुरक्षित― आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २८ मार्च, २०२३ ईसवी।)