● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
इन दिनो ‘भारतीय जनता पार्टी’ की सरकार एक समुदाय-विशेष के पीछे हाथ धोकर पड़ी हुई है। इतना ही नहीं, अटलबिहारी वाजपेयी-सरकार के बाद से देश मे जिस प्रकार का शासन-तन्त्र विकसित हुआ है, वहाँ सिर्फ़ घृणा और हिंसा को जगह दी गयी है। कथित पार्टी से सम्बन्धित जितने भी संघटन गरम तवे पर अपनी-अपनी रोटियाँ सेंकते आ रहे हैं, वह आनेवाले कल के लिए अति भयावह चित्र प्रस्तुत करता है। अब एक नया प्रयोग उभरकर आ चुका है कि जहाँ-जहाँ भारतीय जनता पार्टी की सरकार या फिर उसके डबल इंजिन की सरकार नहीं है वहाँ-वहाँ ‘घृणा का अपना व्यापार’ इस तरह से फैला दो कि ‘हिन्दू बनाम मुसलिम’ दिखे और उसके प्रभाव से अपने पक्ष मे कथित हिन्दुओं का राजनैतिक स्तर पर समर्थन भी प्राप्त कर लो। हमने इस प्रयोग और संयोग को करौली (राजस्थान) मे स्पष्टत: देखा भी। राजस्थान मे काँग्रेस-द्वारा गठित अशोक गहलौत की सरकार है। भारतीय जनता पार्टी और उसके सभी संघटन मिलकर उस सरकार को अस्थिर करना चाहते हैं, इससे इंकार नहीं किया जा सकता। यह अलग विषय है कि अशोक गहलौत अब थक चुके हैं और अतिरिक्त स्पृहा और लोभ के चलते, मुख्यमन्त्री की कुर्सी के साथ चिपके हुए हैं।
न्यू इण्डिया की मोदी-सरकार दिल्ली से शासन करते हुए भी उस ‘दिल्ली’ मे गोटी फ़िट करते हुए, अपनी सरकार बैठा पाने मे सफल नहीं हो पा रही है, जहाँ से अरविन्द केजरीवाल अपनी लोकप्रियता बनाये रखते हुए, भारतीय जनता पार्टी को बुरी तरह से पराजित करते आ रहे हैं। यही कारण है कि केजरीवाल को वहाँ के उपराज्यपाल लगातार परेशान करते आ रहे हैं। वहाँ भी दाल गलती न देखकर घिनौना काण्ड करा दिया गया। अवैध तरीक़े से राम और हनुमान् के नाम पर जो शोभा-यात्रा निकाली गयी थी, उसे लेकर कई प्रकार के प्रश्न खड़े किये गये जा चुके हैं। बताया जा रहा है कि मुसलिम-बहुल इलाक़े जहाँगीरपुरी मे कथित हिन्दुओं-द्वारा बिना सम्बन्धित ज़िलाधिकारी से लिखित अनुमति लिये शोभायात्रा निकाली गयी थी। सबसे पहले तो उस शोभायात्रा के संयोजक के विरुद्ध कठोर काररवाई की जानी चाहिए थी और सरकारी बुल्डोजर से उसका घर गिरवाया जाना चाहिए, जिसने सामाजिक सौहार्द को नष्ट करने के इरादे से शोभायात्रा निकलवायी थी और उनका घर भी, जो सरे आम शोभायात्रा मे तलवारों, लाठियों, हॉकी आदिक को लहराते हुए उग्र तरीक़े से मस्जिद की ओर नारे लगाते हुए दिख रहे थे। क्या ये सभी कृत्य आपराधिक नहीं हैं?
विगत १५ वर्षों से एम० सी० डी०, दिल्ली मे भारतीय जनता पार्टी के नेता रिश्वत ले-देकर निर्माण-कार्य कराते आ रहे हैं। इसे जानते-समझते हुए भी उन पर नियन्त्रण क्यों नहीं किया गया था?
बेशक, बुल्डोज़र चलवायें जायें; लेकिन उसके लिए भी एक क़ानूनी प्रक्रिया होती है। यहाँ कुछ प्रश्न हैं, जिनके उत्तर देश के प्रधानमन्त्री और गृहमन्त्री से जनता माग रही है :–
(१) अवैध निर्माण कराने के लिए जनता को कहाँ से ताक़त मिलती है?
(२) अवैध निर्माण क्यों कराने दिया जाता है?
(३) विकास-प्राधिकरण के जितने भी अधिकारी-कर्मचारी निर्माण-कार्य कराने से सम्बन्धित हैं, उनमे से अभी तक कितनो पर ठोस काररवाई की गयी है? उनमे से कितनो के घरों पर अब तक बुल्डोज़र चलवाये गये हैं?
(४) किसी भी प्रकार के अवैध निर्माण-कार्य को ध्वस्त करने के लिए सम्बद्ध व्यक्ति अथवा संस्था को बिना सूचित किये किसी भी सरकार अथवा सरकारी निकायों को बुल्डोज़र चलवाने का अधिकार है?
(५) किसी व्यक्ति-विशेष, कुछ व्यक्तियों तथा कुछ समुदायों के घरों पर बिना किसी आधार के ध्वस्तीकरण अभियान चलवाना न्यायोचित है?
(६) दो समुदाय-विशेष के स्वयं के कुकृत्यों के कारण यदि सार्वजनिक रूप से खुली गुण्डई की गयी हो तो उन गुण्डों के परिवार के निरपराध व्यक्तियों के आश्रयस्थल को तत्काल प्रभाव से बिना विचार किये ध्वस्त कराना क़ानूनी कृत्य है?
(७) एक ठोस क़ानून बनवाकर अथवा उच्चतम न्यायालय से निर्विवाद आदेश पारित करवाकर देश मे एक-एक अवैध निर्माण-कार्य करानेवाले को १५ दिनों मे अपने अवैध निर्माण हटा लेने की सूचना सार्वजनिक रूप से ‘लाऊडस्पीकर’ से प्रसारित कर और सम्बन्धित व्यक्ति अथवा प्रतिष्ठान से सम्बन्धित व्यक्तियों के निर्माणस्थल की दीवार पर चस्पा कराकर और निबन्धित डाक से उस सूचना भेजकर क्यों नहीं देने की व्यवस्था की जाती?
(८) देश का गृहमन्त्रालय चयनात्मक तरीक़े से काम करने के स्थान पर पारदर्शिता के साथ काम क्यों नहीं करा रहा है?
(९) कुछ समय-पूर्व भारतीय जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी के दिल्ली के जिन रिश्वतख़ोर महिला-पुरुष पार्षदों की वीडियो सार्वजनिक की गयी थी, उनके घरों पर अभी तक बुल्डोजर क्यों नहीं चलवाये गये हैं?
अब एक और महत्त्वपूर्ण विषय पर विचार करते हैं, जो मूल विषय से सम्बन्धित है। भारतीय जनता पार्टी, उसके साथ गठजोड़ करनेवाले राजनीतिक दल तथा उससे सम्बन्धित जितने भी कथित ‘हिन्दू-संघटन’ है, उनसे जुड़े जितने भी विधायक-सांसद् आपराधिक कृत्यों मे दोषी माने गये हैं; परन्तु सरकारी कृपा से मुक्त हवा मे साँस ले रहे हैं; वे मन्त्री, सभी नेता, कार्यकर्त्ता आदिक, जिन्होंने तरह-तरह के अवैध निर्माण-कार्य कराये हैं, उनके घरों और प्रतिष्ठानो पर बुल्डोजर अभी तक क्यों नहीं चलवाये गये हैं? क्या यही शासकीय चरित्र है? सरकार को नहीं भूलना चाहिए कि बदले की राजनीति करनेवाले व्यक्ति, संस्था आदिक की उम्र बहुत लम्बी नहीं होती।
अब वह समय आ गया है कि सार्वजनिक स्थानो पर जितने भी प्रकार के उपासनास्थल बनवाये गये हैं, सभी को ध्वस्त करा दिया जाये; क्योंकि आनेवाले समय मे यही मानवता का संहार कराने के लिए कारक सिद्ध होंगे। जिस किसी को भी प्रार्थना करनी हो, वे अपने घरों मे व्यवस्था करायें।
वर्षों से बाबा रामदेव ने अवैध ज़मीन पर तरह-तरह के निर्माण-कार्य कराये हैं। उन्होंने वर्ष २०१९ से अपनी जिस युनिवर्सिटी का निर्माण-कार्य कराना आरम्भ किया था, उसकी नीवँ ‘अपराध’ और ‘पाप’ की मिट्टी-गिट्टी से भरवायी गयी है। कथित योगगुरु बाबा रामदेव और उनके चेले बालकृष्ण ने बिना नक्शा पास कराये अवैध निर्माण कराये हैं। उल्लेखनीय है कि उन पर ६ करोड़ ९२ लाख रुपये की पेनाल्टी लगायी गयी है; परन्तु सदाचार का सीरप पिलानेवाला बाबा सरकारी संरक्षण प्राप्त किये हुए है। रामदेव ने ‘हरिद्वार रुड़की डीवेलपमेण्ट अथॉरिटी’ (एच० आर० डी०) की अनुमति के बिना निर्माण कराये हैं। वहाँ कई लोग रहते थे और नियमत: सभी प्रकार के कर जमा करते थे; परन्तु पतंजलि युनिवर्सिटी के मैनेजिंग डाइरेक्टर और कुलपति आचार्य बालकृष्ण अपने प्रभाव के बल पर वहाँ रहनेवाले लोग को उनके घरों से धमकी देते हुए भगवा दिया गया है। उनके घरों को तोड़वाकर बाबा रामदेव ने भवन खड़े करा दिये हैं; अब वहाँ केवल पाँच घर दिख रहे हैं। वहाँ कंकरीट की सड़क बनवाकर वास्तविक मकान-मालिकों को घुसने नहीं दिया जा रहा है। वहाँ के लोग का आरोप है कि शासन, प्रशासन तथा न्यायालय बाबा रामदेव के कृत्य को ग़लत तो बता रहा है; परन्तु उन पर काररवाइ करने का साहस नहीं जुटा पा रहा है। कथित युनिवर्सिटी बना दी गयी है; देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने उद्घाटन भी कर दिया है; परन्तु पाप की नीवँ पर बनवायी गयी युनिवर्सिटी का शासन-प्रशासन की ओर से अब तक किसी भी प्रकार का विरोध नहीं किया गया। उत्तरप्रदेश के मुख्यमन्त्री यदि बुल्डोज़र के नाम पर शोहरत बटोरते आ रहे हैं तो उनका परम कर्त्तव्य बनता है कि सबसे पहले अतिक्रमण करके बनवायी गयी युनिवर्सिटी को ध्वस्त करायें। जहाँ युनिवर्सिटी का पार्क दिख रहा है वहाँ उन लोग के घर हैं, जिसे अपनी दबंगई के बल पर बाबा रामदेव और उनके चेले बालकृष्ण ने अधिग्रहण कर लिया है। देश के पत्रकार भी इस पर ‘बाबा रामदेव ऐण्ड कम्पनी’ को घेर नहीं पाते; क्योंकि उन्हें दोनो हाथों से विज्ञापन दे-देकर अपने कदाचार की ओर न देखने का निर्देश प्राप्त हो चुका है। पीड़ित पक्ष ने उत्तरप्रदेश के ‘मुख्यमन्त्री-पोर्टल’ पर शिकायतें भी भेजी हैं; परन्तु कहीं कोई काररवाई नहीं की जा रही है। यही यदि बाबा रामदेव के स्थान पर किसी ‘ मियाँ रामदान अली’ का विश्वविद्यालय होता तो कभी का ज़मींदोज़ करा दिया गया रहता।
इस तरह के बहुत सारे उदाहरण भरे हुए हैं, जहाँ कथित हिन्दुत्व का पोषण किया जा रहा है और मुसलमानत्व को ध्वस्त किया जा रहा है।
ऐसा नहीं कि देश की जनता राजनैतिक नौटंकी को समझ नहीं रही है; बस उसे डर सताता रहता है तो यही कि आवाज़ उठाने पर उसके साथ भी सरकारी तन्त्र बुरा बरताव न कर दे। यहीं पर एक महत्त्वपूर्ण प्रश्न उभरता है– हम सरकार के अन्याय को खुली आँखों से कब तक देखते रहेंगे?
आज देश मे आये-दिन प्रत्येक वस्तु के मूल्य मे इतनी अधिक बढ़ोतरी करा दी गयी है कि वह औसत जनता की पहुँच से बाहर की होती जा रही है। इसमे कोई दो राय नहीं है कि अपनी शिथिल और लोकघाती आर्थिक नीतियों पर पर्दा लगाने के लिए यह सरकार बेवज़्ह के विषय प्रस्तुत कराती आ रही है। आज रुपये की क़ीमत बेहद निन्दनीय और लज्जाजनक स्थिति को प्राप्त कर गयी है। आज की तारीख़ मे एक डॉलर की क़ीमत ८२.४ रुपये का हो चुका है; महँगाई-दर लगभग ७ प्रतिशत है। इन सभी विषयों से आम जनता का ध्यान भटकाने के लिए देश मे ‘भय’ का वातावरण बनवाया जा रहा है, जो कि राष्ट्रहित मे कदापि नहीं है।
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