● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
देश के समस्त राज्यों और संघ-शासित क्षेत्रों मे सिर्फ़ भारतीय जनता पार्टी और उसके संघटक दलों की सरकारों का गठन हो और शेष दल विपक्षी की भूमिका मे रहें, ऐसी अलोकतान्त्रिक और गर्हित कामना को जीनेवाली ‘मोदी ऐण्ड कम्पनी’ के पराभव की घड़ी समीप आ चुकी है।
आज (५ सितम्बर) ही झारखण्ड-विधानसभा मे कथित कम्पनी के मालिकान के गालों पर जो करारे तमाचे पड़े हैं, उनका देशवासियों ने विधिवत् ढंग से दर्शन-लाभ प्राप्त कर लिया है। ख़रीद-फ़रोख़्त मे पारंगत ‘मोदी ऐण्ड कम्पनी’ के झारखण्ड-विधानसभा मे शून्य (०) पर दसों विकेट ‘क्लीन बोल्ड’ के रूप मे गिरते गये। हरफ़नमौला के रूप मे झारखण्ड के मुख्यमन्त्री हेमन्त सोरेन ने ऐसी ‘आदिवसिया’ चाल चली कि रानी, वज़ीर राजा वज़ीर– सबके-सब धराशायी होते रहे। अन्त मे, हेमन्त सोरेन के ‘झारखण्ड मुक्ति मोर्चा ने ४८-० से पराजित कर, ‘मोदी ऐण्ड कम्पनी’ को सतह पर लाकर खड़ा कर दिया; बेचारे भाग खड़े हुए।
झारखण्ड-विधानसभा मे विश्वास-प्रस्ताव के पक्ष मे ध्वनि मत और मत-विभाजन के फलस्वरूप बहुमत के रूप मे ४८ मत पड़े थे, जबकि विश्वास-प्रस्ताव के विपक्ष मे ० (शून्य) मत। झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के ३०, काँग्रेस के १५ (कैश-काण्ड मे लिप्त तीन विधायकों के अतिरिक्त), राष्ट्रीय जनता दल, भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी (माले) तथा राष्ट्रीय काँग्रेस पार्टी के १-१ विधायक ने पक्ष मे मतदान किया था।
मतदान कराने से पूर्व ही हवा का रूख़ पूरी तरह से हेमन्त सोरेन के पक्ष मे जाता हुआ देखकर ‘मोदी ऐण्ड कम्पनी’ (बी० जे० पी०, आ० ज० सू०, सरयू राय तथा अमित यादव) भाग खड़ी हुई।
दूरदर्शी और सूक्ष्मदर्शी लेंसों को आँखों मे फिट करके पी० एम० ओ०-कार्यालय मे बैठा मुखिया जिस तल्लीनता के साथ सदन की कार्यवाही पर गिद्ध-दृष्टि गड़ाये हुए था, वह अपने षड्यन्त्र मे पूरी और बुरी तरह से विफल रहने के कारण दूसरे शिकार की तलाश मे उड़ गया।
मत-विभाजन से पूर्व मुख्यमन्त्री हेमन्त सोरेन ने मोदी ऐण्ड कम्पनी को जमकर धोते हुए कहा, “भारतीय जनता पार्टी ने एक आदिवासी को राष्ट्रपति बनाया है; लेकिन एक आदिवासी से मुख्यमन्त्री की कुर्सी छिनने की कोशिश कर रही है। लोग बाज़ार से सामान ख़रीदते हैं, जबकि बी० जे० पी० विधायकों को ख़रीदती है।”
‘मोदी ऐण्ड कम्पनी’ हमारी लोकतन्त्रीय प्रणाली का पिछले ८ वर्षों से गला घोंटने मे लगी है; किन्तु अब उसकी अनेक राज्यों से बिना किसी समारोह के विदाई होनी तय हो चुकी है।
सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ५ सितम्बर, २०२२ ईसवी।)