उत्तर प्रदेश में शैक्षिक सुधारों की दिशा में बदलाव के लिए महामुहिम शुरू

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’

1996 से 2000 तक का दौर उत्तर प्रदेश की बेसिक शिक्षा के स्वर्णिम समय जैसा था । जब राज्य स्तर से लेकर जिला, ब्लाक, न्यायपंचायत और स्कूल स्तर पर शिक्षकों और चुने गए शिक्षक समूहों ने सरकारी स्कूलों की शिक्षण पद्धतियों में व्यापक बदलाव और सुधार की स्वप्रेरित मुहिम चलाई थी, पर किन्ही कारणों से यह प्रयास दीर्घकालिक नहीं रहा।

कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए प्रशिक्षक महोदय

सर्व शिक्षा अभियान (SSA) उत्तर प्रदेश, यूनिसेफ इकाई उ. प्र. (UNICEF UP), सीमैट (SIEMAT) प्रयागराज और इग्नस पहल की साझेदारी में वैसे ही प्रयास आधुनिक और विकसित स्वरूप में वर्तमान शैक्षिक सत्र से फिर से शुरू हो चुके हैं। समग्र प्रयासों की पहली कड़ी के रूप राज्य सन्दर्भ समूह (SRG) की चयन कार्यशाला 12 से 14 अक्टूबर 2019 की अवधि में लखनऊ में सम्पन्न हुई। इस चयन कार्यशाला में प्रदेश के सभी 75 जिलों से चुनकर आए 375 शिक्षकों ने भाग लिया।

कार्यशाला के प्रतिभागीगण

चयन कार्यशाला का संचालन, निर्धारित प्रदर्शन मानकों के आधार पर प्रतिभागियों की रेटिंग और फाइनल चयन का कार्य इग्नस पहल के विशेषज्ञों अहिबरन यादव, डॉ. अवनीश यादव, डॉ. चमन प्रकाश, डॉ. दीप्ति श्रीवास्तव, गुरजोत सिंह सिद्धू, मनीषा चौधरी, मुकेश भार्गव, डॉ. शुभांगी भिड़े, सुबीर शुक्ल, सुदर्शन यादव, सुरेन्द्र प्रसाद सिंह, तुषार तम्हाणे और योगेन्द्र शर्मा द्वारा किया गया।

कार्यशाला में उपस्थित शिक्षकवृन्द प्रशिक्षक के विचार समझते हुए

चयन प्रकिया और परीक्षण की संकल्पना और डिजाइन सुबीर शुक्ला एवं सुरेन्द्र प्रसाद सिंह द्वारा की गई थी। परीक्षण प्रश्नपत्र और अवलोकन प्रपत्रों का विकास इग्नस पहल टीम ने मिलजुलकर किया। मोबाइल आधारित दो स्तरीय बहुविकल्पीय परीक्षण करने, डाटा संकलन आदि में गुरजोत सिंह सिद्धू का तकनीकी योगदान रहा। प्रदर्शन आकलन के लिए चयन कार्यशाला के सत्रों का संचालन एक साथ तीन कक्षों में अवनीश यादव, मुकेश भार्गव और सुदर्शन यादव ने किया। इग्नस पहल के बाकी सदस्यों द्वारा प्रदर्शन अवलोकन और रेटिंग का कार्य किया गया।

समग्र शिक्षा की ओर से आदेश जारी करने, कार्यशाला के आयोजन, प्रबन्धन और समन्वयन में फूल मुहम्मद और शुभ्रांशु उपाध्याय का विशेष योगदान रहा। चयन कार्यशाला के दौरान समग्र शिक्षा क्वालिटी सेल टीम से श्री ए. पी. सिंह, वरिष्ठ विशेषज्ञ, सुश्री शिखा शुक्ला, शिक्षा विशेषज्ञ और श्री ए. के. राय, शिक्षा विशेषज्ञ की विशेष उपस्थिति रही।

प्रदेश स्तर पर चयनित राज्य सन्दर्भ समूह को राज्य स्तरीय कार्यशालाओं के माध्यम से इग्नस पहल के विशेषज्ञों द्वारा इस रूप में तैयार किया जायगा कि वे आने वाले सालों में राज्य की शैक्षिक गुणवत्ता सुधार हेतु अपनी सशक्त, कारगर और परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकेें। पहली कार्यशाला में उनकी तैयारी इस रूप में करायी जाएगी कि वे अपने-अपने जिलों में जिला सन्दर्भ समूह और ब्लाक सन्दर्भ समूह के साथ चयन कार्यशाला करके उनका चयन करें। जबकि दूसरी कार्यशाला में इन्हें राज्य स्तरीय प्रशिक्षक के रूप में तैयार किया जाएगा जिसके बाद वेे जिला स्तरीय प्रशिक्षणों का संचालन और मॉनिटरिंग कर सकें।

उपस्थित प्रशिक्षणार्थी

विदित हो कि शिक्षा में त्वरित और स्थायी सुधार के लिए इग्नस पहल ने एससीईआरटी, एसएसए उत्तर प्रदेश और युनिसेफ के साथ मिलकर 2016-17 में एक ऐसे प्रोजेक्ट की संकल्पना और पायलट की शुरुआत की थी जिसका क्रियान्वयन इस अवधारणा पर आधारित है कि बच्चे के सीख पाने के लिए हर स्तर के लोगों का सीखना ज़रूरी है। यानि कि बच्चे में 5 प्रतिशत सुधार के लिए शिक्षकों में 10 प्रतिशत, सुपरवाइजर में 20 प्रतिशत, जिला स्तरीय प्रशिक्षकों में 40 और राज्य स्तर के लोगों में 60 प्रतिशत सुधार लाना होगा। इसलिए इस प्रोजेक्ट में हर स्तर पर मूल्यांकन की व्यवस्था की गई है। बच्चों के सीखने का स्तर जांचने के लिए मौखिक परीक्षाएं, शिक्षकों और प्रशिक्षकों का प्रदर्शन जांचने के लिए सूचकों का विकास किया गया है जिनकों हर माह मोबाइल के द्वारा अपलोड किया जा सकेगा।

इग्नस पहल के प्रोग्राम निदेशक सुरेन्द्र प्रसाद सिंह ने बताया कि बच्चों के स्तर पर लर्निंग आटकम और शिक्षकों के स्तर पर प्रदर्शन मानकों में सुधार सम्बन्धी यह प्रोजेक्ट वर्ष 2017-18 में प्रदेश के पांच जिलों – आगरा, प्रयागराज, बरेली, जीबी नगर और वाराणसी के एक-एक ब्लाक में पायलट किया गया था। 2018-19 में इसका विस्तार इन्हीं जिलों के सभी स्कूलों में किया गया।

कम समय में तेजी से सकारात्मक परिणाम और सुधार को देखते हुए इस साल से इस प्रोजेक्ट का प्रदेश के सभी प्राइमरी स्कूलों में लागू किया जा रहा है। जिसके लिए अभी से राज्य स्तर पर एक क्षमतावान और सशक्त समूह की पहचान के लिए एसआरजी चयन की यह कार्यशाला आयोजित की गई थी।