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ग्रामीण को सर्प ने काटा, समय से इलाज के अभाव में चली गई जान

अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक के चक्कर में पड़े रहे परिजन

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दीपक कुमार श्रीवास्तव-

कछौना (हरदोई) – कोतवाली कछौना क्षेत्र के अंतर्गत बुधवार सुबह नहर किनारे धरती के फूल खोदने गए 40 वर्षीय ग्रामीण को जहरीले सर्प ने डस लिया,जिससे उसकी हालत बिगड़ गई । परिवार के लोग उसे उपचार हेतु अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक कराने में लगे रहे, हालत में सुधार न होने पर परिजन उसे उपचार हेतु निजी हॉस्पिटल लेकर गए । जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया ।

             मिली जानकारी के अनुसार विकासखंड कछौना की ग्राम सभा समसपुर निवासी ग्रामीण श्रीराम (40) पुत्र फकीरे बुधवार की सुबह गांव के पास स्थित शारदा नहर पर धरती के फूल खोदने ग्रामीण साथियों के साथ गया था। इसी दौरान एक जहरीले सर्प ने उसे डस लिया। साथ गए ग्रामीण साथियों की सूचना पर पहुंचे परिवार वालों ने अज्ञानता व अंधविश्वास के चलते उसे अस्पताल ले जाने के बजाय ओझाओं से झाड़-फूंक कराने में लगेे रहे। झाड़-फूंक से हालत में सुधार न होने पर गंभीर हालत में उसे निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां पर चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। ग्रामीण की असमय मृत्यु से परिजनों के ऊपर दुख का पहाड़ टूट पड़ा। अपने पति की मृत्यु का समाचार मिलते ही पत्नी बेसुध हो गई, मृतक के चार छोटे-छोटे बच्चे हैं। परिजनों की अज्ञानता व अंधविश्वास के कारण परिवार का भरण पोषण करने वाला असमय मृत्यु का शिकार हो गया। परिजनों ने बिना पोस्टमार्टम कराए गांव में उसके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार कर दिया। जिसके कारण मृतक का गरीब परिवार सरकार द्वारा दैवीय आपदा के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता से भी महरूम हो गया है।

सर्पदंश के मरीज को तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या चिकित्सक के पास ले जाएं – सीएचसी अधीक्षक

सीएचसी कछौना के अधीक्षक डॉक्टर किसलय बाजपेयी ने बताया कि सर्प दंश के मामलों में प्राथमिक उपचार के तौर उसे बचाने तरीका यह है कि सांप काटे स्थान से थोडा हटकर दो-तीन कसाव युक्त बंधा बांध देना चाहिए। ब्लेड आदि से चीरा लगाकर कटे स्थान को दबाकर विषैला रक्त निकालने का प्रयास करना चाहिए।सर्प के काटने पर मरीज के परिजनों को झाड़फूक के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए। इसके स्थान पर मरीज को तत्काल ही निकटतम स्वास्थ्य केंद्र या चिकित्सक के पास ले जाना चाहिए। देरी करने पर मरीज की जान भी जा सकती है। मरीज को जगाते रहने का प्रयास करना चाहिए और नींद आने पर उसे चाय देनी चाहिए। सीएचसी अधीक्षक ने बताया कि सीएचसी पर सर्पदंश के उपचार हेतु एंटी वेनम इंजेक्शन (वैक्सीन) उपलब्ध है ।

वैज्ञानिक युग में आज भी अंधविश्वास की गिरफ्त में हैं लोग

 चांद और मंगलग्रह पर कदमताल कर रहे वैज्ञानिक युग में भी अंधविश्वास का कायम रहना वाकई चिंता का विषय है। इस संवेदनशील मुद्दे पर जनजागरूकता के लिए ना तो सरकार चिंतित है और ना ही स्वयंसेवी संस्थाएं सक्रिय दिखती हैं। खासकर गांव-गिरांव में यह सामाजिक बुराई ज्यादा दिखाई देती है।आज के वैज्ञानिक युग में भी लोग टोना-टोटके, तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास से जकड़े हुए हैं। बच्चों की तबीयत खराब होने पर पहले डॉक्टर के पास जाने के बजाए मिर्च झोंककर नजर उतारना, गंभीर बीमारी या सर्पदंश पर ओझा को बुलाकर झाड़-फूंक कराना आदि आज भी लोगों की आदत बनी हुई है।