झोलाछाप डाक्टर के क्लीनिक में युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत

अझुवा/कौशांबी– अझुवा के वार्ड नं 10 नेहरू नगर किराना गली निवासी बचई लाल केसरवानी पुत्र स्व. फुर्ती लाल उम्र लगभग 40 वर्ष जो कि दिव्यांग भी था अपने किराना गली स्थित पैतृक मकान में अकेले रहता था। बचई लाल का विवाह नहीं हुआ था । इसके एक भाई राजू की पूर्व में मृत्यु हो चुकी है और उसका भतीजा और भाभी इस समय प्रयागराज में रहते हैं।

बचई लाल की कस्बे के ही जी.टी.रोड स्थित गणेश सिंह चौहान से जान पहचान थी । जो जी.टी. रोड स्थित अपने घर मे बिना रजिस्ट्रेशन कई साल से क्लीनिक चलाते हैं। डा. चौहान के मुताबिक कल रात से वह बचई लाल का इलाज अपने क्लीनिक में कर रहे थे । जहां आज सुबह बचई लाल की इलाज के दौरान मृत्यु हो गई।

बचई लाल की मृत्यु हो जाने के कुछ घंटे में डाक्टर चौहान बचईलाल के किराना गली स्थित घर में अपना कब्जा करने हेतु ताला लगाने पहुंचे तो मुहल्ले वालों को बचईलाल की मृत्यु की जानकारी मिली । उन लोगों ने बचईलाल के भतीजे रचित केसरवानी को फोन पर सूचना दी । जिस पर रचित परिवार सहित तुरंत इलाहाबाद से अझुवा भागकर आए और मुहल्ले के लोगों के साथ डाक्टर चौहान के पास अपने चाचा का शव लेने पहुंचे । डा.चौहान ने शव देने से इंकार करते हुए कहा कि इसका अंतिम संस्कार मैं करूंगा और यह अपना घर मेरे नाम वसीयत कर चुका है।

जब मुहल्ले के लोगों और नगर के संभ्रांत लोगों ने दबाव बनाया तब झोलाछाप डॉक्टर ने बड़ी मुश्किल मे बचईलाल का शव उसके भतीजे को सौंपा। ज्ञात हो कि बचई लाल का पैतृक घर अभी तक उसके पिता के नाम दर्ज है । ऐसे मे दो महीने पहले बचई लाल उसकी वसीयत डाक्टर चौहान को कैसे कर गया? बचईलाल की मृत्यु एकाएक झोलाछाप डाक्टर चौहान के बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे क्लीनिक में कैसे हो गई जबकि उसके बीमार होने की जानकारी उसके सगे संबंधियों और मुहल्ले वालों तक को नही मिली ?

ऐसे मे बचई लाल की क्लीनिक पर संदिग्ध मौत तमाम सवालों के घेरे में है। कही बचईलाल की मौत के पीछे उसका बेशकीमती पैतृक घर तो नहीं। ऐसे मे बचईलाल की मौत की असली वजह जानने के लिए उसके भतीजे ने उसके शव का पोस्टमार्टम कराए जाने के लिए थाना प्रभारी सैनी को लिखित तहरीर देते हुए चौकी प्रभारी अझुवा को मुहल्ले वासियों के साथ सूचना दी है । जिस पर स्थानीय पुलिस मामले मे सक्रिय हो चुकी है।

—-अरविंद केसरवानी/आकाश केसरवानी
पत्रकार अझुवा