ग्राम पूरा बहादुर में हो रही श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस कथा सुनाते हुए परम श्रद्धेय आचार्य विमलेश दीक्षित महाराज ने बताया कि जीव की भक्ति जब सुदृढ़ हो जाती है। तो भगवान को दर्शन देना आवश्यक हो जाता है ।
भक्ति के बिना जीवन अधूरा है । भोजन में जैसे नमक आवश्यक है जिंदगी में वैसे ही भक्ति आवश्यक है । भक्ति करने के लिए जीव को किसी साधन की आवश्यकता नहीं है जीव को साधना की आवश्यकता है । संतों ने महापुरुषों ने यह बताया है साधना तीन प्रकार से होती है । एक मन से एक कर्म से और एक वाणी से । वाणी की साधना में जीव अपने विचारों को मुख से बाहर निकालता है । कर्म की साधना से जीव सुंदर कर्म करके अपने को भगवत भक्त बनाता है । जीव को चाहिए परमात्म तत्व की प्राप्ति के लिए 5 कर्मेंद्रिय 5 ज्ञानेंद्रिय पंच महापुराण, पंचमहाभूत, चार तत्व, मन के साथ में संयोजित करके परमात्म तत्व के चिंतन में लगना चाहिए । यह बात श्री शुक्राचार्य महाराज ने राजा परीक्षित को द्वितीय स्कंध की कथा सुनाते हुए बताई ।
आगे की कथा सुनाते हुए परम श्रद्धेय आचार्य जी ने बताया कि भगवान का अवतार भक्त के घर में होता है । सत्य है कि भगवान का अवतार कराने वाला भगवान का भक्त हो और निर्मल मन हो तो रघुनायक शबरी के घर भी जाते हैं ।
आज पूरा बहादुर की पावन धरा धाम पर आचार्य श्री ने भगवान श्री कृष्ण के जन्म की कथा विस्तार से श्रवण कराई । आचार्य श्री ने कहा कि भगवान पृथ्वी पर दो कारणों से आते हैं एक तो गो ब्राह्मण की रक्षा के लिए और दूसरा धर्म की पुनः स्थापना करने के लिए । कलयुग में सत्य के अलावा कोई धर्म नहीं है । मगर सत्य क्या है ? सत्य है सच्चिदानंद ! सच्चिदानंद क्या है ? सच्चिदानंद माने भगवान श्री कृष्ण । सच्चिदानंद है भगवान श्री कृष्ण और उसके अलावा इस संसार में सत्य नहीं है । मगर योगी लोग क्या कहते हैं कलयुग में कि महाराज यह कुछ भी सत्य नहीं है सत्य तो हमारा परिवार है । परिवार सत्य होगा तो भगवान कहां से आएंगे ? क्योंकि भगवान जब नहीं रहेंगे तो वहां यह भगवान की माया नहीं जा सकती है ?