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आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की रविवासरीय/रविवारीय पाठशाला में ‘कल’

लगभग चार वर्षों से देश के शीर्षस्थ हिन्दी-दैनिक समाचारपत्र ‘दैनिक जागरण’ समाचारपत्र में हमारी ‘भाषा की पाठशाला’ अनवरत प्रकाशित होती आ रही है। पहले यह पाठशाला ‘प्रति शनिवार’ को सप्तरंग पृष्ठ पर अपना भाषिक आकार ग्रहण करते हुए, ज्ञान-पिपासुओं को परितृप्त करती थी; गत (‘गत्’ शब्द अशुद्ध है।) सप्ताह से इसके दिन में परिवर्त्तन हो चुका है।

अब आपको ‘प्रत्येक रविवार’ को ‘झंकार’ परिशिष्ट (अलग से चार पृष्ठ) के ठीक पीछे के ‘सप्तरंग’ पृष्ठ पर ‘हिंदी हैं हम’ के अन्तर्गत हमारी ‘भाषा की पाठशाला’ दिखेगी, जिसमें आप सभी मानसिक स्तर पर प्रवेश कर सकते हैं। आप सभी एक ‘जिज्ञासु’ और ‘आदर्श विद्यार्थी’ की भूमिका में हमारी पाठशाला में उपस्थित रहेंगे, आशा तो की ही जा सकती है। आपके लिए पाठशाला में अध्ययन-सामग्री को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत करेंगे, फ़ीचर-सम्पादक प्रियवर अरुणकुमार श्रीवास्तव जी।

कल (२२ अगस्त) की ‘रविवासरीय पाठशाला’ में आपको ‘बलि’, ‘बली’, ‘वाली’, ‘बाली’ तथा ‘बालिग़’ के विषय में सारगर्भित जानकारी प्राप्त होगी। हो सकता है, आपको ‘चौंकने’ का मौक़ा भी मिल जाये। बहरहाल, ‘कल’ की प्रतीक्षा करते हैं; क्योंकि ‘कल’ (२२ अगस्त, २०२१ ई०) सदैव आता है।