श्रमिकों की हृदयविदारक मृत्यु के लिए कौन है उत्तरदायी?

‘मुक्त मीडिया’ का ‘आज’ का सम्पादकीय

— पृथ्वीनाथ पाण्डेय

आज औरंगाबाद से जालना के मध्य हमारे १६ प्रवासी मालगाड़ी की चपेट में आकर मृत्यु को प्राप्त हो गये थे। बेचारे रेललाइन की पटरियों के सहारे बहुत दूर तक की यात्रा करते-करते थक चुके थे; शरीर ने जवाब दे दिया था, फलत: वे दोनों रेलपटरियों के बीच में आराम करने लगे, उसी बीच कब उनकी आँखें लग गयीं, पता ही नहीं चला। हाँ, जब रेलमार्ग पर शरीरे के चीथड़े और रक्तरंजित पटरियाँ दिखीं तब ज्ञात हुआ था कि निराश्रित १६ श्रमिक अपने जीवन से हाथ धो बैठे हैं।

प्रवासी जीवन जी रहे हमारी श्रमिक बन्धु-भगिनियों के सड़कमार्ग से अपने घर लौटने पर ‘कोरोना योद्धा’ कहलानेवाले कापुरुष/नपुंसक/क्लीव पुलिसकर्मी उनपर निर्लज्जतापूर्वक डण्डे बरसाते हैं। अन्तत:, कोई मार्ग न दिखने पर उन्होंने अपने गन्तव्य तक पहुँचने के लिए एकमात्र विकल्प के रूप में ‘रेलमार्ग’ का चुनाव किया था। बेचारों को महाराष्ट्र से मध्यप्रदेश जाना था; परन्तु उन्हें क्या मालूम था कि वे अपने घर ज़िन्दा नहीं पहुँच सकते। अब उनके शवों को घर पहुँचाया जा रहा है।

इसके लिए देश की निर्दय सरकार पूरी तरह से उत्तरदायी है; क्योंकि प्रवासी श्रमिकजन की सुरक्षित वापसी के लिए उसने कोई ठोस उपाय उन तक सम्प्रेषित नहीं किया और अब भी चुप्पी साधे हुए है। यही कारण है कि नितान्त निरुपाय, निस्सहाय श्रमिकगण रेलमार्ग से जाने के लिए बाध्य और विवश कर दिये गये हैं, यद्यपि वह अवैध था तथापि उनके लिए कोई अन्य मार्ग नहीं था।

हमारी सरकार कितनी दोगली है, जो दो तरह के नियम बनाती आ रही है। पहले नियम के अन्तर्गत ‘लॉक-डाउन’ के नाम पर जनसामान्य को घर से निकलने नहीं दे रही है और दूसरे नियम के अन्तर्गत देश के शराबियों को ‘लॉक-डाउन’ का खुला उल्लंघन करने के लिए उकसा रही है।

ऐसी अमानवीय, उत्तरदायित्वविहीन, निर्मम, संवेदनहीन और धनलोलुप सरकार को धिक्कारने के लिए सारे शब्द छोटे पड़ गये हैं।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ८ मई, २०२० ईसवी)