बछरांयू-जनपद अमरोहा की कोतवाली बछरायूं के एक मोहल्ले से महिला द्वारा 5 दिन से अनशन पर बैठने का मामला सामने आया है जहां महिला का आरोप है की पुलिस ने उसकी तहरीर पर मनमाफिक कार्यवाही नहीं की ओर उसके साथ अभद्रता करने वाले दबंगो को बिना किसी कार्यवाही के ही छोड़ दिया।*
बताते चलें कि नगर के मोहल्ला बकाबाद निवासी नेमकुमार की पत्नी ममता का बीती 15 तारीख को उसके ही मोहल्ले के राहुल कुमार , नवीन कुमार, निक्की आदि से किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया था । जहां उपरोक्त नामित युवकों ने ममता के साथ अभद्रता की थी। जिस पर ममता ने अभद्रता करने वाले युवको के खिलाफ बछरांयू कोतवाली में तहरीर देकर कानूनी कार्यवाही की मांग की थी। ममता का आरोप है कि पुलिस ने उसकी दी गयी तहरीर के अनुसार कार्यवाही न करके दबंगो को थाने ले जाकर पूछताछ करके बिना किसी कार्यवाही के ही छोड़ दिया। इसी बात को लेकर ममता पिछले पांच दिन से अनशन पर बैठी है। बीते सोमवार व बुधवार को ममता की हालत ज्यादा खराब हो गयी थी जिस पर ममता के परिजनो ने उसे धनोरा के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया था जहां ममता का इलाज चल रहा है। ममता ने पुलिस द्वारा मनमाफिक कार्यवाही ना करने को पर जिलाधिकारी अमरोहा, पुलिस अधीक्षक अमरोहा, लखनऊ में सचिव को भी शिकायती पत्र भेजा है । लेकिन उसके बाद भी बछरांयू पुलिस ने मामले को गम्भीरता से नहीं लिया है। अब सवाल यह उठता है की जो महिला पांच दिन से लगातार अनशन पर बैठी हुयी है कोई भी प्रशासनिक अधिकारी उसे देखने क्यों नहीं आया। जबकि पीड़िता अमरोहा जिलाधिकारी महोदय, व पुलिस अधीक्षक को भी मामले से अवगत करा चुकी है।
आखिर कब तक ममता को पुलिस की लापरवाही का शिकार होना पड़ेगा। काश यदि पुलिस ममता की तहरीर के अनुसार कार्यवाही करती तो आज ममता को अस्पताल में भर्ती होना नहीं पड़ता।
ममता को निकाला गया सरकारी अस्पताल के महिला वार्ड से बाहर
पीड़िता ममता को डाक्टरों ने महिला वार्ड से बाहर निकाल दिया । जहां ममता ने अपनी सास, छोटी ननद कविता के साथ पूरी रात अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर पर स्थित तीमारदार कक्ष में बितायी। आखिर ममता को क्यों निकाला गया रुम से बाहर ? जबकि बेचारी ममता तो पहले से ही पुलिस की लापरवाही का शिकार थी । लेकिन उसे यह नहीं पता था कि वह अस्पताल में इलाज के लिये नहीं बल्कि अस्पताल में भी डाक्टरों के गलत व्यवहार का शिकार होने आयी है। एक तरफ तो हमारी सरकार स्वास्थ्य विभाग पर बहुत बड़े पैमाने पर काम कर रही है और वहीं दूसरी ओर धनोरा के सरकारी अस्पताल के कुनाल जैसे डाक्टर सरकार के नियमों को हवा में उड़ा रहे हैं। सबसे बड़ी बात तो ये है कि जब मीडिया कर्मियों ने रात्रि में ड्यूटी पर रहे डाक्टर के बारे में जानकारी करने की कोशिश की तो वहां पर मौजूद डॉक्टर ने जानकारी देने से इंकार कर दिया । धनोरा चिकित्सा अधिक्षक का कहना है की मामला मेरे संज्ञान में नहीं है।