● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
महाराष्ट्र की राजनीति इन दिनो देश की सभी समस्याओं को पीछे छोड़ चुकी है। नरेन्द्र मोदी के खेमे मे जश्न का माहौल है; क्योंकि शकुनि ने पाशा फेंककर बाज़ी अपने हक़ मे कर ली है।पहले शिवसेना को पूरी तरह से पैदल कर दिया था और अब, ‘राष्ट्रीय काँग्रेस पार्टी’ (एन० सी० पी० मे सेंध लगाकर शरद पवार को लगभग शक्तिहीन कर दिया है। उनका दायाँ हाथ कहलानेवाला प्रफुल्ल पटेल ने ऐसी दग़ाबाज़ी की है कि महाराष्ट्र की राजनीति मे उसकी छीछालेदर हो रही है। शकुनि ने शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को जाने कौन-सी घुट्टी पिला दी है कि वह उसके आगे-पीछे नाचते हुए दिखता रहा।
गत २ जुलाई को मोदी-सरकार ने महाराष्ट्र मे ‘एन० सी० पी०’ के भ्रष्ट विधायकों के विरुद्ध ई० डी०, आइ० टी० डी० तथा सी० बी० आइ०-जाँच कराने का भय दिखाकर ‘एन० सी० पी०’ को अपने पक्ष मे कर लिया और देखते-ही-देखते, महाराष्ट्र ही नहीं, अपितु देश की राजनीति मे भूचाल आ गया। एन० सी० पी० के मीर ज़ाफ़र अजीत पवार ने अपने आठ विधायकों :– छगन भुजबल, धनंजय मुण्डे, अनिल पाटिल, दिलीप वलसे पाटिल, धर्मराव अत्राम, संजय बनसोड़े, अदिति तटकरे तथा हसन मुश्रीफ़ के साथ अपराह्ण २ बजे राजभवन पहुँच गये, जहाँ पहले से ही महाराष्ट्र की चिर-परिचित राजनीति मे विश्वासघात के एक और चलचित्र के प्रदर्शन करने की तैयारी कर ली गयी थी; फिर क्या था, अपराह्न के ३ बजते ही रजत-पट पर प्रकाश चमका और देखते-ही-देखते, मुख्यमन्त्री एकनाथ शिन्दे, उपमुख्यमन्त्री देवेन्द्र फड़नवीस की उपस्थिति मे , सभी मन्त्रियों को उनके पद और गोपनीयता की शपथ दिलायी गयी थी। इस घटनाक्रम मे शरद पवार के अति विश्वसनीय छगन भुजबल, प्रफुल्ल पटेल तथा शरद पवार के भतीजे अजीत पवार की प्रमुख भूमिका रही है। यह वही अजीत पवार है, जिस पर अभी तक मोदी-सरकार ‘सिंचाई-घोटाला’ के आरोप मे जाँच कराने की धमकी देती आ रही है। स्मरणीय है कि नरेन्द्र मोदी ने अपने नाटकीय अन्दाज़ मे पिछले २७ जून को भोपाल मे विपक्षी दलों के ₹२० लाख करोड़ के घोटाले का ज़िक्र किया था। अपनी उसी भाषण के दौरान उन्होंने महाराष्ट्र ₹७० हज़ार करोड़ के ‘को-ऑपरेटिव’ एवं ‘सिंचाई-घोटाले’ का भी वर्णन किया था। उल्लेखनीय है कि ये दोनो ही विभाग अजित पवार के पास थे। अब महाप्रश्न है― इस प्रकरण और ‘महाविकास अघाड़ी पार्टी’ के सत्ता मे रहते समय बड़ी संख्या मे जिन नेताओं पर मोदी की ई० डी० और सी० बी० आइ० काररवाई कर रही थी, वह काररवाई चलती रहेगी वा ‘नरेन्द्र मोदी ऐण्ड कम्पनी’ की विश्व-चर्चित ‘वाशिंग मशीन’ मे डालकर आरोपितों को भ्रष्टाचार-मुक्त कर दिया जायेगा, जैसा कि वर्ष २०१४ से ऐसा ही हम देखते आ रहे हैं?
इस नाटकीय परिदृश्य मे हाल ही मे घटित उस राजनीतिक घटनाक्रम का भी प्रभाव झलक रहा है, जिसमे शरद पवार ने पिछले १० जून यानी एन० सी० पी० के पच्चीसवें स्थापना-दिवस के अवसर पर अपनी बेटी सुप्रिया सुले और प्रफुल्ल पटेल को पार्टी के कार्यकारी अध्यक्षसहित विभिन्न राज्यों का प्रभार सौंप दिया था, जिसके कारण अजीत पवार की नाराज़गी बाहर निकलकर आने लगी। वे इस घटनाक्रम को अपने अधिकारक्षेत्र मे हस्तक्षेप (‘हस्ताक्षेप’ अशुद्ध है।) के रूप मे मानने लगे थे, यद्यपि शरद पवार ने कहा था कि अजीत पवार राज्य देखेंगे।
‘मोदी ऐण्ड कम्पनी’ ने इस परिस्थिति को भाँप लिया था। उसे मालूम है कि जब तक महाराष्ट्र की ‘महाविकास अघाड़ी पार्टी’ मे दरार नहीं पैदा की जायेगी तब तक आगामी विधान और लोकसभा चुनावों मे उसके लिए वहाँ बड़ी संख्या मे सीटें जीत पानी “टेढ़ी खीर” होगी।
दूसरी ओर, एन० सी० पी०-प्रमुख शरद पवार का कहना है कि न घर टूटा है और न ही पार्टी टूटी है। हमारे कई विधायकों पर ई० डी० की जाँच हो रही थी, जिसके भय से वे लोग मोदी-खेमे मे चले गये हैं; परन्तु यहाँ यह भी महत्त्वपूर्ण है कि उनके भतीजे अजीत पवार ने ‘महाराष्ट्र-महाविकास अघाड़ी पार्टी’ मे सेंध लगाकर एन० सी० पी० धड़े को अपने साथ उड़ा लिया और चाचा शरद पवार को ‘हवा’ तक नहीं लगी। यहाँ उसी घटना की पुनरावृत्ति हुई है, जिसके अन्तर्गत शरद पवार ने ‘भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस’ के साथ विश्वासघात कर, ‘राष्ट्रीय काँग्रेस पार्टी’ (एन० सी० पी०) का गठन कर लिया था।
फिर क्या था, शरद पवार के विद्रोही भतीजे अजीत पवार को तेज़ी मे बदल रहे घटनाक्रम के चलते महाराष्ट्र-मन्त्रिमण्डल का उपमुख्यमन्त्री बना दिया गया और उनके ८ विधायक मन्त्री बनाये गये हैं। मन्त्रिमण्डल मे शामिल किये गये, वे वही उपमुख्यमन्त्री और मन्त्री हैं, जिनके विरुद्ध मोदी-सरकार की ओर से भ्रष्टाचार की जाँच करायी जा रही थी।
हमे नहीं भूलना चाहिए कि उच्चतम न्यायालय की संविधानपीठ ने पिछले मई-माह मे शिवसेना (उद्धव-गुट) की एक याचिका पर महाराष्ट्र-विधानसभाध्यक्ष को निर्देश किया था कि वे शिन्दे-गुट के १६ विधायकों की अपात्रता पर शीघ्र निर्णय करें। आगामी ११ अगस्त को इस पर निर्णय किया जाना है। इसे ही देखते हुए, ‘मोदी ऐण्ड कम्पनी’ ने अजीत पवार को अपने खेमे मे लाया है; क्योंकि सबकुछ ठीक-ठाक रहा तो अजीत पवार को महाराष्ट्र का अगला मुख्यमन्त्री बनाया जा सकता है। महाराष्ट्र के वर्तमान उपमुख्यमन्त्री देवेन्द्र फड़नवीस भी मुख्यमन्त्री बनाये जा सकते हैं; क्योंकि देवेन्द्र ‘भारतीय जनता पार्टी’ के नेता हैं और पार्टी चाहेगी उनके नेता का ही महाराष्ट्र-राज्य पर एकाधिकार बना रहे। यह भी सूचना है कि अजीत पवार महाराष्ट्र के अगले मुख्यमन्त्री बनाये जाने की शर्त पर ही शिन्दे-सरकार मे सम्मिलित हुए हैं। इस दृष्टि से अगले कुछ महीनो मे महाराष्ट्र की बदलती तस्वीर दिलचस्प होगी। उल्लेखनीय है कि अपात्र विधायकों मे से एक नाम महाराष्ट्र के वर्तमान मुख्यमन्त्री एकनाथ शिन्दे का भी है।
शरद पवार ने इस घटना के लिए सीधे तौरपर नरेन्द्र मोदी को ज़िम्मादार बताया है। उनका ऐसा आरोप बिलकुल सही है; क्योंकि नरेन्द्र मोदी तीसरी बार प्रधानमन्त्री बनने का स्वप्न पूरा करने के लिए किसी भी सीमा तक जा सकते हैं। निकट भविष्य मे महाराष्ट्र मे विधानसभा का चुनाव भी होनेवाला है। हमे नहीं भूलना चाहिए कि नरेन्द्र मोदी ने पहले उद्धव ठाकरे की पार्टी को तोड़ा था और अब शरद पवार की पार्टी को तोड़ा है। कहीं ऐसा तो नहीं, इस खेल मे शरद पवार की भी कोई भूमिका रही हो; क्योंकि शरद पवार के शातिर दिमाग़ को समझ पाना सहज नहीं है।
बहरहाल आज (५ जुलाई) को बान्द्रा के भुझबल नॉलेज सोसाइटी के ‘मेट’ सेण्टर मे हुई बैठक मे जिस शैली मे अजीत पवार ने कहा, वह महाराष्ट्र की राजनीति मे अजीत पवार की महत्त्वाकांक्षा को सिद्ध करता है। अजीत ने कहा :― आपकी (शरद पवार) उम्र अधिक हो गयी है। राज्य-सरकार के कर्मचारी ५८ साल मे, केन्द्र के ६० साल मे रिटायर्ड हो जाते हैं; लेकिन आप तो ८४ साल के हैं; अब हमे आशीर्वाद दीजिए।
(सर्वाधिकार सुरक्षित― आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ६ जुलाई, २०२३ ईसवी।)