धर्म की रक्षा के लिए दण्ड भी आवश्यक : सीता
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वन का विस्तार जितना सुंदर था, उतना ही भयावह भी। एक दिन प्रातःकाल सीता आश्रम से कुछ दूर वनौषधियाँ एकत्र करने निकलीं। उनके साथ कुछ ऋषि-पत्नियाँ भी थीं। मार्ग में उन्हें […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वन का विस्तार जितना सुंदर था, उतना ही भयावह भी। एक दिन प्रातःकाल सीता आश्रम से कुछ दूर वनौषधियाँ एकत्र करने निकलीं। उनके साथ कुछ ऋषि-पत्नियाँ भी थीं। मार्ग में उन्हें […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वन की वह संध्या अत्यन्त विलक्षण थी। आकाश पर धूसर मेघों की पतली परतें तैर रही थीं। सूर्य अस्ताचल की ओर झुक रहा था, पर उसकी लालिमा मानो धरती के हृदय […]