अँखिया के कजरा हेराइ गइल सजनी

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय


अँखिया के कजरा हेराइ गइल सजनी,
हथेलिया के मेहँदी रिसाइ गइल सजनी।
बहरिया-बहरिया हर ओरिया उजार बा,
घरवा के दियवा बुझाइ गइल सजनी।
जोहत रहि गइनी अन्हेरिया में अंजोरिया,
एही तरी अँखिया पथराइ गइल सजनी।
कवन खेल खेललु तू हमरा जिनिगिया में?
अँखिया के तहार पनिया मराइ गइल सजनी।


(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, इलाहाबाद ; २ फरवरी, २०१८ ईसवी)