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हिंदू धर्म में द्विविवाह की कोई अवधारणा नहीं, दूसरी पत्नी को पहली पत्नी के होते हुए पारिवारिक पेंशन का अधिकार नहीं : गुवाहाटी हाईकोर्ट

जे. के. चौधरी 
एडवोकेट, उच्च न्यायालय 
खण्डपीठ, लखनऊ 
9453333384

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने माना कि हिंदू धर्म में द्विविवाह की कोई अवधारणा नहीं है और इसलिए पहली पत्नी के होते हुए, दूसरी पत्नी पारिवारिक पेंशन की हकदार नहीं है।

जस्टिस संजय कुमार मेधी की पीठ ने इस प्रकार एक मामले में देखा जिसमें याचिकाकर्ता ( प्रतिमा डेका ) ने पारिवारिक पेंशन की मांग करते हुए खुद को बीरेन डेका की पत्नी होने का दावा करते हुए अदालत का रुख किया था।

याचिकाकर्ता ने प्रस्तुत किया कि उसका पति सिंचाई विभाग में एक अप्रेंटिस के रूप में काम करता था और अगस्त 2016 में उसका निधन हो गया था, इसलिए वह पारिवारिक पेंशन की हकदार है। उसने अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया कि उसके तीन बच्चे हैं।

दूसरी ओर याचिकाकर्ता के दावे को प्रतिवादी नंबर 6 सहित प्रतिवादियों द्वारा हलफनामा दाखिल करके चुनौती दी गई। प्रतिवादी नं 6 ने प्रस्तुत किया कि वह मृतक कर्मचारी की पहली पत्नी है और कानून के अनुसार, वह पारिवारिक पेंशन की हकदार है।

इस स्टैंड का समर्थन सरकारी वकील, सिंचाई विभाग के साथ-साथ, सरकारी वकील ए हसन, एजी, असम ने भी किया।

पक्षों को सुनने और रिकॉर्ड के अवलोकन के बाद न्यायालय ने कहा कि पक्ष धर्म से हिंदू हैं और हिंदू विवाह अधिनियम के अनुसार द्विविवाह की कोई अवधारणा नहीं है, बल्कि यह भारतीय दंड संहिता के तहत एक अपराध है और यह तलाक का आधार भी है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि बच्चे (दूसरी पत्नी से पैदा हुए) भी बड़े हैं और इसलिए, हालांकि बच्चों को नाबालिग होने की स्थिति में कुछ राहत दी जा सकती थी, लेकिन वह स्थिति भी नहीं है।

इस न्यायालय ने कहा कि उसके पास याचिका को खारिज करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है क्योंकि दूसरी पत्नी इस मामले में पहली पत्नी के अस्तित्व में पारिवारिक पेंशन की हकदार नहीं है, जिसके तथ्य स्वीकार किए जाते हैं और पक्षकार धर्म से हिंदू हैं।