पुस्तक समीक्षा कृति:- दरिया देश प्रेम का


प्रकाशक:- साहित्य संगम संस्थान प्रकाशन,इंदौर मध्यप्रदेश
पृष्ठ:-40
लेखक :-आशीष पाण्डेय जिद्दी
समीक्षक:- राजेश कुमार शर्मा “पुरोहित”


 दरिया देश प्रेम का कृति के लेखक आशीष पांडेय जिद्दी वन विभाग मध्यप्रदेश में सेवारत है। साहित्य जगत से विगत एक दशक से जुड़े हैं। वीर रस,श्रृंगार रस के कवि हैं। छन्दों के ज्ञाता हैं।

आपकी प्रस्तुत कृति के निर्देशक डॉ. आचार्य भानुप्रताप वेदालंकार,प्रबन्ध संपादक शेलेन्द्र खरे”सोम” हैं। मुखावरण पर भारत माता का चित्र बहुत सुन्दर है। मुखावरण आकर्षक लगा।कृति के अंतिम पृष्ठ पर कवि परिचय प्रकाशित किया गया है।सम्मानित चित्रमय झलकियां बहुत अच्छी लगी।
प्रस्तुत कृति के प्रधान संपादक शेलेन्द्र खरे सोम ने कहा कि ये कृति देश प्रेम से ओतप्रोत रचनाओं का कुंज है। इस कृति में वीर छन्द,ताटक छन्द,कुकुभ,लावणी,मधुशाला,कलाधर आदि प्रचलित छन्दों में रचनाएँ हैं। साहित्य संगम के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवीर सिंह मन्त्र ने कहा कि दरिया देशप्रेम का एक देशभक्त साहित्यकार कवि के ह्रदय उदगार है। यह अनूठी भावधारा व शिल्प वाली काव्यकृति है। अनुभा मुंजारे जी लिखती है कवि पांडेय जी का लेखन साहित्य जगत में एक देदीप्यमान सितारे की तरह जगमगा रहा है। इस कृति में देशभक्ति समाज सुधार वीरों का आव्हान ईमान देशप्रेम युवाओं के मन मे देशभक्ति के भाव जगाने में सफल रचनाएँ हैं। छाया सक्सेना प्रभु ने कहा कि यह काव्य संग्रह देशप्रेम का श्रेष्ठ काव्य संग्रह है। शब्दों का संयोजन ऐसा है कि सबके समझ मे रचनाएँ आ जाती है। सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश मीना भट्ट जी ने प्रस्तुत कृति के बारे में शुभकामना संदेश में लिखा कि इस कृति की कविताएं देश के जवानों को समर्पित है। लेखनी सशक्त है कम उम्र में साहित्य जगत में विशिष्ठ स्थान बनाया है।


डॉ. ज्योत्सना सिंह जी ने इस कृति की भूमिका में लिखा कि सहज सरल भाषा मे सृजित गीतों में संगीत व लय का सुंदर समायोजन है।रस, छन्द,अलंकार की योजना का अदभुत संगम समाहित है। वीर रस की रचनाएं भी बहुत सुंदर है। कवि का चिंतन देशप्रेम के साथ साथ समाज के हर वर्ग के लिए है।


अर्वाचीन में जब देश की युवा पीढ़ी पश्चिमी सभ्यता का अंधानुकरण करने लगे हैं। युवापीढ़ी फैशन परस्ती की जिंदगी जी रहे हैं। कई युवा उन्मादी हो रहे हैं। ऐसे में भारतीय संस्कृति व संस्कारों की स्थापना के साथ ही देश की ताजा समस्याओं पर पैनी कलम चलाकर युवाओं में देशप्रेम की अलख जगाने का कार्य युवा कवि आशीष पांडेय जिद्दी ने किया है। प्रस्तुत कृति में देश प्रेम की कविताएं ऐसी है जो रोंगटे खड़े कर देती है। त्राटक छन्द लावणी छन्द घनाक्षरी छन्द एवम काव्य के विभिन्न तत्वों का समावेश आपकी कविताओं में मिलता है।भाव पक्ष व कला पक्ष दोनों प्रधान हैं। कृति की भाषा सरल व बोधगम्य है। आज जब युवा लेखकों में छंदमुक्त लिखने की होड़ लगी है ऐसी स्थिति में पांडेय जी ने छन्दों में बंधी रचनाएँ प्रस्तुत कृति में लिखी है। देशप्रेम के चिंतन को अपनी कविताओं में कहने का सुन्दर प्रयास किया है।


ताटक छन्द में वे लिखते हैं” हम हैं उस धरती के बेटे जहाँ भगत रखवाले थे।लक्ष्मीबाई वीर शिवाजी देश प्रेम मतवाले थे।” हमारे देश मे ऐसे महापुरुष हुए है जिनके पदचिन्हों पर हम सबको चलने की आज आवश्यकता है।


मधुशाला छन्द में आप कहते है कि “भारत माता की रक्षा का अब कर्तव्य हमारा है। टीस उठी माँ के सीने में उसने हमें पुकारा है।” आज देश मे विभिन्न समस्याएं हैं जिनका सामना आज हर देशवासी को करना पड़ रहा है।


वीर रस की उनकी रचना देखिये” भारत माँ को गाली दे उसको जिंदा गाड़ेंगे। जो भी दुश्मन हाथ उठाये उसके हाथ उखाड़ेंगे।।” साहस से आगे बढ़ने व बैरियों से मुकाबला करने को प्रेरित करती रचना बहुत अच्छी लगी।


कुकुभ छन्द ,वीर छंद की काव्य रचनाएँ दिल को छू गई। लावणी छन्द आधारित कविता में देश मे छुपे देशद्रोहियों को खोजकर सजा देने की आवश्यकता जताती विरोध दर्ज कराती शानदार रचना मुक्त कविता में पांडेय जी ने देश की सरहद पर बढ़ती आतंकवाद की समस्या दंगा फसाद के प्रति चिंता जाहिर की है।आज आतंकवाद पनपने का कारण देश की एकता की कमी है। आज हम देशवासी जाति धर्म के झूंठे झगड़ों में आपसी फूट से बिखर गए हैं। जबकि हम सब एक ही धरती माँ की संतान है।


ताटक छंद में सरहद पर शहीद होने वाले शहीद परिवारो का दुख दर्द लिखा है। हम आज घरों में इसलिए सुरक्षित है क्योंकि हमारे सैनिक रात दिन सर्दी गर्मी बरसात सहकर भी भारत माँ की रक्षा हेतु तैनात है। सच्चा स्वर्ग हिंदुस्तान है। वे लिखते है ऐसे अमर शहीदों को हमें कोटि कोटि नमन करना चाहिए ” भारत माता के चरणों मे शीश झुकाने वालों को।नमन करें हम देश धर्म मे शीश कटाने वालों को।”


माटी कविता में पाप द्वेष मिटाने की बात कही है इंसान के ये ही असली दुश्मन है। मन से ये बुराई मिट जाए तो मन निर्मल हो जाता है। निर्मल मन मे ही प्रभु निवास करता है।”हम ही है माटी के रक्षक हमको ही कदम बढ़ाना है। माटी में ही जन्म लिया है माटी में मर जाना है। हमारे लाल किले पर जब तिरंगा लहराता है तो कितना सुंदर लगता है ।


हर हाथ मे झंडा हो कविता में कवि ने जय हिंद व जय भारत नारे की गूंज से आसमान गूंज उठे हर हाथ मे तिरंगा हो। देश मे अमन हो ।कोई गद्दार न हो। बस इतना सा ध्यान रखने की आवश्यकता है।


आह्वान युवाओं का कविता में युवाओं को देश सेवा के लिए उठने यानी जागने की अलख जगाई है। आज देश की संस्कृति को बचाने का काम युवाओं को करना है। जागो हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई सभी मिलकर देश विकास का काम करो। देश के गद्दारों को छांट कर प्रेम से मिलकर देश विकास का काम हम सभी को करना है।


ये वतन है स्वर्ग अपना कविता में बताया कि इस देश मे अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी हुए। मथुरा काशी इसमें ही है। यहां साबरमती व कुरुक्षेत्र का इतिहास अमर है। यही स्वर्ग है। इसमें वीर शहीदों की तमाम यादेँ हैं।


मेरा गाँव ताटक छन्द में रचना गाँव की यादें ताजा कर देती है। हरियाली ताल तालिया पोखर नदियां झरने मीठा जल बाग बगीचे आदि गांवों की शोभा है। खेलकूद,कोयल गाती कितनी अच्छी प्रकति है गाँव मे। अपनत्व भाईचारा देखते ही बनता है। सीधे लोग मेहनत से अन्न उपजाते। हिलमिलकर घरों में आपस मे बतियाते। खिलखिलाते उनमुक्त चेहरे गांवों के लोगों की पहचान है। शहरों में आदमी कभी खुलकर हंसता हुआ नहीं मिलेगा।


कवि लिखता है संस्कार भाईचारा ग्रामीणों का सोना है। जो गाँव छोड़कर शहरों में बस गए उनकी संस्कृति छूट गई समझो।


ताटक छन्द लावणी छबद व कलाधर छन्द में कवि ने एकता अखण्डता व देशभाव की रचनाएं लिखी है। वे कलाधर छन्द में लिखते हैं “एकता बनी रही सदैव देश हिन्द शान तेज हो अखण्ड देश भावना जगाइए। हो जवान जो शहीद वंदनीय पूजनीय जन्म लेंय शूरवीर देव को मनाइए।।”

देशभक्ति गीत में क्रांतिकारियों ने गोलियां खाकर फांसी के फंदे को चूमकर देश को अंग्रेज़ो की दासता से आज़ाद कराया उन्हें नमन करने को कहा है।”कर चले जो हमारे हवाले वतन आओ मिलके करें सब उनको नमन।”

माटी केर लड़िका जे बघेली भाषा की काव्य रचना में बताया कि इस मिट्टी में ही हम खेले कूदे इसी में बड़े हुए। इस वतन के लिए हमे अपने प्राण देने के लिए तैयार रहना चाहिए। इस मिट्टी की रक्षा करना हमारा फ़र्ज़ है। आज राजनीति में लूटपाट मची है। देश के जवानों को देखिए जो घर परिवार को छोड़ देश की रक्षा करते हैं।

विषयपरक देशद्रोही /गद्दारी शीर्षक की रचना में कवि ने देशद्रोह करने वालों को देशप्रेमी लोगो से बचने की बात की है। हमे अपनी मातृभूमि को खून पसीना एक कर सजाना है।

गजल के शेर देखिये”तीन रंगों की ये ताकत एकता का रूप है। शौर्य साहस और अमन की इससे ही पहचान हो।” हमारे देश की विविधता में एकता ही पहचान है।

ओजमयी रचना ताटक छन्द में सियासत में बैठे लोगों पर धवल वेषधारियो पर करारा व्यंग्य है।”लाखों शीश कटे वीरों के भारत की आज़ादी में। भूल गई हर कुर्बानी को अब सत्ता आबादी में।।”

श्रृंगार छन्द में कवि लिखता है “वही भारत माता का लाल बने जो गद्दारों का काल। लहू में जिसके भरा उबाल चले वो शेरो वाली चाल।।”

नमन वीर शहीदों को वीर छन्द में कवि ने राजगुरु सुखदेव भगत सिंह खुदीराम का न लेते हुते उनकी शहादत को याद किया। आज ऐसे वीरों से हर देशवासी को प्रेरणा लेने की जरूरत है। कवि कहता है”याद करें हम उन वीरों को और लगा दें अब ललकार।जय हिन्द कहें ऐसे मिलकर ,गूँज उठे सारा संसार।।”

गीतिका में दुश्मनी की भावना मिटाने नेक राह पर चलने दीन दुखियों की मदद करने प्रेम से रहने सद्कर्म करने पाश्चात्य सभ्यता व संस्कृति से बचने की बात कही । वहीं उन्होंने सुभाष चंद्र बोस जैसे युवाओं की आज देश को जरूरत है बताई। चंद्रशेखर आज़ाद व बिस्मिल की कहानी की आज देश मे आवश्यकता है जिन्हें पढ़कर देशभक्ति जग उठे। वे महिला सशक्तिकरण की बात करते हुए कहते हैं” लाज नारी की लूटे अब अस्मिता की बात है। आज फिर तलवार वाली एक रानी चाहिए।”


इतिहास गवाह है कि एक अकेली लक्ष्मीबाई ने हजारों अंग्रेजों का सामना तलवार से ही किया था। मुक्तक, आल्हा छन्द ताटक छन्द में रचनाएँ बहुत सुंदर लिखी गई है। पर्वत भी है पूजे जाते पावन गंगा है आई। गेरों को भी हिन्द देश मे हम सब कहते हैं भाई।”


कितने ही विदेशी लोग शरणार्थी बन आये सबको देश मे रहने का हक मिला ये हमारे देश की विशेषता है। सहमा हुआ इंसान है रचना में मजहबी फसादों से हुए नुकसान की बात कही है आज देश बारूद के ढेर पर खड़ा है। इंसान इंसान से नफरत करने लगा है। दहशत से सहमा आज का इंसान पत्थर दिल हो गया है। जिहाद के नाम पर हम भटके हैं। जो लोग हिन्दू मुसलमान को फुट डालकर लड़ाता है वह मतलबपरस्त लोग है जो इंसानियत के दुश्मन है। लोग आतंकवाद फैला रहे है। बम बारूद तोप से आतंक फैला रहे हैं।। आतंवादियों को प्रेम से सुधारा जा सकता है। व्यक्ति आतंकवादी क्यों बना पहले ये जाने। प्रेम ही इसका निदान है। सच लिखा आपने।


ईमान काव्य रचना में कवि ने लिखा कि देश धर्म इंसान के लिए हम सबसे मुकाबला कर सकते हैं। लेकिन ईमान बेचकर यदि सम्मान या प्रशंसा मिल जाये तो उसे कभी भी हम स्वीकार नहीं करेंगे। फाँसी पर जितने भी वीर चढ़े वे सभी ईमान के पुजारी थे भगतसिंह सुखदेव राजगुरु भारी थे।हिंदुस्तान जन्नत है प्राणों से प्यारा देश है।


वन्दे मातरम लघु आलेख में लेखक ने बताया कि वंदेमातरम में त्याग समर्पण कुर्बानी और भारत माता की सुरक्षा का सार समाया हुआ है। इससे नई चेतना आती है। यह एक ऐसा मन्त्र है जो सर्वसिद्ध है।


भूमिपुत्रों के लिए मुक्तक लिखते हैं” जब किसानों की फसलें लहलहाती है जब हवा अपने सुर में गुनगुनाती है। महक उठती है फिजाएं दिल की उस पल। जब माटी से सोंधी सोंधी खुशबू आती है।।”


ताटक छन्द की रचना में सरहद पर हमला बोलने वालों को ललकारते हुए जिद्दी लिखते हैं” भारत की सीमा पर आकर यदि हमको ललकारोगे। सच कहते है मूर्ख सुनो तुम अपने काल पुकारोगे।।”


कविता हिंदी भाषा के गुणगान का जिक्र करती बहुत सुंदर बन गई। आज हिंदी हमारे देश मे ही उपेक्षित है । रोजमर्रा के काम आज भी हिंदी में करने की जरूरत है। आज हमें हिंदी का प्रचार प्रसार करने की जरूरत है। मिट रही है राष्ट्र से हिंदी का चिंतन करो। प्रार्थना सभी कवियों से पुनः सृजन करो।।”

कौमी एकता का संदेश देता मुक्तक देखिये ” न हिन्दू है न मुसलमान है हम सब ऊपर वाले की संतान है। मिटा दो भेद सारे दिलों से अपने आओ गले लगें भाई हम सब एक ही इंसान है।।”


हिंदी ग़ज़ल के उम्दा शेर लिखे आपने”जब जब उड़े गगन में ये हौसला बढ़ाइए। हरगिज़ न डगमगाये ईमान है तिरंगा।”
स्वरचित गीत शीर्षक में कवि ने जमीं को स्वर्ग बनाने के लिए सभी को मिलकर कर्म करने का संदेश दिया है। शांति की स्थापना करने की बात कही। मन के द्वेष मिटाने की बात कही। शिकवे शिकायत भूल सबको अपनाने की बात कही है। जननी जन्मभूमि का कर्ज चुकाने की बात कही।


मनहरण घनाक्षरी में संसार मे मानव को निष्काम भाव से कर्म करने की बात कही। श्रेष्ठ कर्म करने वाला ही सुजान होता है। आत्मसम्मान उसी का रहता है। धर्म ज्ञान को बढ़ाने की जरूरत है। लोभ मोह जैसे विजातीय शत्रुओं पर विजय पाने का प्रयास करो। सेवा भाव तभी जगता है। प्राणियों की सेवा ,समाज सेवा, देश सेवा भाव होना चाहिए। भेदभाव भूल हम सब एकता के सूत्र में बंध जाएं तभी मानव जीवन की सफलता है कवि कहता है”एकता के फूल खिले शत्रु देश देख हिलें। भेदभाव भूल मिले, हिन्द के जवान हों।”


इस कृति की अंतिम प्रस्तुति”बनाकर हम तिरंगे को कफन अपने लिए चलते” रचना में कवि ने देश के लिए न्योछावर व पूर्ण समर्पित होने की बात रखी। वतन की सीमा पर दुश्मन के प्राण है हरते। लहू पानी की तरह वतन की लाज में बहते।
हमारे सैनिक लहू बहाकर देश को बचाते हैं।


“ये सोना था ये सोना है ये सोना ही रहेगा हिन्द। वतन के हर सपूतों में चिराग -ए -वीर हैं जलते।।” चित्रमय झलकियां कवि के परिवार से संबंधित बहुत सुंदर हैं। कवि आशीष जिद्दी की प्रस्तुत कृति देश के हर विद्यालय के हर बालक बालिका के हाथ मे पहुंचे ऐसा प्रयास हो। देशभक्ति के भाव जगाने में सक्षम ये कृति कवि को साहित्य जगत में नई पहचान बनाएगा। ऐसा विश्वास है मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं व मंगलमय बधाइयाँ।

  • राजेश कुमार शर्मा”पुरोहित”
    समीक्षक,शिक्षाविद,साहित्यकार
    98,पुरोहित कुटी,श्रीराम कॉलोनी,भवानीमंडी, जिला झालावाड़ राजस्थान
    पिन 326502
    मोबाइल 7073318074
    Email 123rkpurohit@gmail.com