— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
फ्रांस से जब पाँच युद्धक विमान ‘राफैल’ भारत लाये जा रहे थे तब भारत का मीडिया-तन्त्र ऐसा विवरण प्रस्तुत कर रहा था, जिससे लग रहा था, मानो चीन का सर्वनाश पलक झपकते कर दिया जा रहा हो। इससे इंकार नहीं किया जा सकता है कि भारत के मीडियाकर्मी गला फाड़-फाड़ कर मूर्खतापूर्ण विवरण प्रस्तुत करने में लाजवाब रहे हैं। यही कारण है कि अब, जब चीन भारत के वास्तविक नियन्त्रण-रेखा से सटे क्षेत्र में परमाणु हथियारों को ले जानेवाले प्रक्षेपास्त्रों तैनात कर रहा था तब भारत के मीडियावाले और भारत की सरकार सो रही थी। वह देश की अन्दरूनी घातक राजनीति में एक दल-विशेष के रूप में अपनी घृणित भूमिका में दिखती रही और वह भूमिका अब भी दिख रही है।
ओपेन इण्टेलिजेंस सोर्स ‘डेट्रेस्फा’ द्वारा उपग्रह से प्राप्त जो चित्र सामने आये हैं, वे भारत को चौंकानेवाले हैं। उन चित्रों का अध्ययन करने से ज्ञात हुआ है कि चीन ने लद्दाख से ६०० किलोमीटर की दूरी पर परमाणु बमवर्षक प्रक्षेपास्त्रों की तैनाती कर दी है। उस बमवर्षक का नाम ‘डीएफ-२६/२१’ है। उसकी तैनाती चीन के शीनजियांग प्रान्त के ‘कूर्ला आर्मी बेस’ पर की गयी है। ‘फेडरेशन ऑव़ अमेरिकी साइण्टिस्ट’ की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने कुर्ला बेस पर पहला प्रक्षेपास्त्र अप्रैल, २०१९ ई० में और दूसरा प्रक्षेपास्त्र अगस्त, २०१९ ई० में तैनात किये थे। चीनी मीडियातन्त्र के अनुसार, ‘डीएफ-२६’ प्रक्षेपास्त्रों से सुसज्जित चीनी सेना की ६४६वीं ब्रिगेड को सबसे पहले अप्रैल, २०१८ ई० में तैनात करने की चीनी राष्ट्रपति ने घोषणा की थी। उसके बाद पुन: जनवरी, २०१९ में चीनी मीडिया ने अपनी सरकार की घोषणा प्रसारित की थी– चीन की सेना ने ‘डीएफ– २६’ प्रक्षेपास्त्रों के साथ चीन के पश्चिमोत्तर पठारी भाग, जो भारत की सीमा से लगा हुआ है, में युद्धाभ्यास किया था। इससे सुस्पष्ट हो गया है कि चीन भारतीय सीमा से लगे क्षेत्र में अपनी परमाणुशक्ति का विस्तार कर रहा है, जिसकी फ़िलहाल, भारत-सरकार अनदेखी कर रही है, जो भारत के लिए कहीं से भी हितकर नहीं है। ज्ञात हुआ है कि उक्त प्रक्षेपास्त्रों की मारक क्षमता चार से पाँच हज़ार किलोमीटर तक की है। चीन यदि उन बमवर्षक प्रक्षेपास्त्रों का प्रयोग करता है तो भारत के अधिकतर शहर नष्ट हो सकते हैं।
‘फेडरेशन ऑव़ अमेरिकी साइंटिस्ट’ की नवीनतम रिपोर्ट का अध्ययन करने से ज्ञात होता है कि चीन की सामरिक शक्ति भारत की तुलना में बढ़कर है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की तुलना में चीन की परमाणुशक्ति आधी से भी अधिक है। चीन फ्रांस को पीछे छोड़ते हुए, विश्व का तीसरा सर्वाधिक परमाणु हथियारधारक देश बनने की स्थिति में आ चुका है। ऐसा इसलिए कि विगत १५ वर्षों में चीन की परमाणुशक्ति दोगुणी हो चुकी है।
अन्तरराष्ट्रीय संस्था ‘सिप्री’ की नवीनतम तुलनात्मक रिपोर्ट कहती है कि चीन के पास इस समय ३२० परमाणु हथियार हैं, जबकि भारत के पास मात्र १५० हैं। चीन ने पिछले एक साल में जहाँ ३० परमाणु हथियारों में वृद्धि की है, वहीं भारत ने केवल १० परमाणु हथियारों की वृद्धि की है। ऐसा इसलिए भी कि भारत के प्रधानमन्त्री को विपक्षी एकता को भंग कर एकमात्र सार्वकालिक प्रधानमन्त्री बनने का अपना स्वप्न पूरा करना है। भारत का विपक्ष और बुद्धिजीवीवर्ग लगातार चीन की विस्तारवारवादी नीति पर प्रश्न उठाता आ रहा है; परन्तु प्रधानमन्त्री ‘मौनी बाबा’ बने रहते हैं।
चीन की ‘पीपल्स लिबरेशन आर्मी’ अपने हरकतों से बाज़ नहीं आ रही है। वह वास्तविक नियन्त्रण रेखा के उस पार अपनी सामरिक शक्ति का विस्तार करती आ रही है। आश्चर्य है, भारत के सैन्य अधिकारी उसकी मंशा को भाप नहीं पा रहे हैं। चीन एक तरफ़ समझौते की बात करता है और दूजी तरफ़ पीठ में छुरा भोंकता है। उसने तरह-तरह के युद्धक विमानों को तैनात कर दिया है। उन्हीं में से एक है, ‘शेनयांग जे-११/१६’ विमान, जिसकी उड़ान भरने की क्षमता ३,५५० किलोमीटर प्रति घण्टे की है। इसे चीन का ‘सुखोई’ विमान भी कहा जाता है; क्योंकि इसका बेस मॉडल रूस के युद्धक विमान ‘सुखोई’ के समान है, जिसे चीन ने अपने वातावरण के अनुसार विकसित किया है। इस समय चीन के पास २५० से अधिक शेनयांग जे-११/१६ युद्धक विमान हैं, जिसमें ३० मिलीमीटर की तोप भी लगी है। इसके अलावा चीन ने छ: ‘जियान एच-६’ बमवर्षक विमान की भी तैनाती कर रखी है। यह विमान परमाणु हथियार को लेकर कुशलता से उड़ान भरने की क्षमता रखता है। इनमें से दो विमानो में परमाणु हथियार लगा दिये गये हैं। इस विमान की उड़ान-क्षमता ६,००० किलोमीटर प्रतिघण्टा की है। इसके अतिरिक्त चीनी सेना ने ‘जियान जेएच-७’ युद्धक विमानो की तैनाती कर दी है, जिनकी कुल संख्या १२ है। इसके भी दो युद्धक विमान परमाणु हथियारों से युक्त हैं।
इन तथ्यों की रौशनी में भारत के सैन्य अधिकारियों के कान अब अच्छी तरह से खड़े हो जाने चाहिए; क्योंकि वास्तविक नियन्त्रण रेखा पर दोनों देश की सेना, युद्धक विमान, उपकरण आदिक आमने-सामने हैं। युद्ध के हालात स्पष्टत: दिख रहे हैं।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ६ अगस्त, २०२० ईसवी।)