कछौना (हरदोई) : केंद्र सरकार देश के शहर एवं कस्बे में साफ-सफाई हेतु स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छ सर्वेक्षण की शुरुआत की है। नगर पंचायत कछौना पतसेनी में गंदगी का अंबार लगा है। जिम्मेदारों द्वारा नगर की साफ सफाई की तरफ उचित ध्यान नहीं दिया जाता, जबकि नगर में पिछले वर्ष डेंगू व कोविड-19 की दूसरी लहर में दर्जनों लोग बीमारियों की चपेट में आने से मृत्यु हो चुकी है।
नगरों में बीमारियां बढ़ती जा रही हैं। इसी समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार स्वच्छ भारत अभियान के तहत स्वच्छ सर्वेक्षण की शुरुआत की है। इस स्वच्छ सर्वेक्षण 2022 के तहत गीले, सूखे और खतरनाक कचरे का पृथक्करण, गीले कचरे के निपटान की प्रक्रिया, गीले और सूखे कचरे का निपटान और पुनर्चक्रण, निर्माण मलबे का निपटान, साइट पर डंप किए गए कचरे की मात्रा और शहरों की सफाई की स्थिति को ध्यान में रखा जायेगा, ताकि देश को स्वच्छ रखा जा सके। इन सब आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए नगर पंचायत द्वारा लखनऊ हरदोई राजमार्ग के किनारे नगर पंचायत ने कूड़ा डंप करके से लगा रखे हैं। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी बीमारियों में इजाफा हो गया है। नगर में गंदगी के ढेर से निकलती बदबू जहाँ दुकानदारों का बैठना मुश्किल किए है वहीं उस गन्दगी में पनपते वायरस से नगर में महामारी फैलने की प्रबल सम्भावनाएं पैदा हो रही हैं। गन्दगी के ढेर से काफी हद तक तकलीफ गुजर रही है। देखने वाला हर व्यक्ति सफाई कर्मचारियों पर कोई टिप्पणी नहीं करता बल्कि जिम्मेदारों की उदासीनता पर सवालिया आरोप लगाते हुए नगर की चरमराई सफाई व्यवस्था पर अफ़सोस करता है। ऐसे ही नगर के भीतर न जाने कितनी जगह कूड़े कचरे का ढेर और बजबजाती नालियाँ स्वच्छता अभियान की पोल खोल रहीं है। हमारे देश के सभी नगरीय क्षेत्र व शहरों में स्वच्छता अभियान चलाकर स्वच्छ सर्वेक्षण 2022 का परीक्षण चल रहा है जिसमें जो नगर अथवा शहर स्वच्छता की दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ पाया जाएगा उस को उसी क्रम में उच्च और उच्चतर रैंकिंग के अंक दिए जाएँगे।लेकिन यहाँ नगरवासियों से साफ-सफाई व्यवस्था चकाचौंध का सकारात्मक फीडबैक लेकर कागजी दस्तावेजों में नगर का सौंदर्यीकरण बढ़ाने का काम किया जा रहा है जबकि जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट पलट है। हकीकत में नगर में कूड़ेदान ही कूड़ा हो गए हैं।
एक तरफ नगर पंचायत कछौना पतसेनी को स्वच्छता में प्रथम स्थान रखने के लिए जगह-जगह होर्डिंग लगाकर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। वही लाखों रुपए के कीमत के कूड़ेदान नगर में जगह-जगह टूटे पड़े हैं। कूड़ेदान कूड़ा हो चुके हैं। जिसके कारण जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। लोगों के घरों और प्रतिष्ठानों का कूड़ा डालने के लिए नगर में जगह-जगह कूड़े दान रखवाएं गये थे, जो वर्तमान समय में अधिकांश गायब हैं, शेष टूटे पड़े हैं। देखरेख के अभाव में कूड़ा दान कूड़ा बन चुके हैं। जिससे कचरा सड़क पर बिखरा पड़ा रहता है। ग्रामीणों ने इस समस्या के विषय में कूड़ा निस्तारण की समस्या में के बारे में जिमेदारों को अवगत कराया था, परंतु जिम्मेदारों ने ध्यान देना मुनासिब नहीं समझा।
रिपोर्ट- पी०डी० गुप्ता