● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
‘काशी हिन्दू विश्वविद्यालय’, वाराणसी देश के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय के रूप मे जाना जाता रहा है; परन्तु कुछ वर्षों से वहाँ ऐसी शर्मनाक घटनाएँ घटती आ रही हैं, जो कि ‘बी० एच० यू०’ के नाम पर कभी न मिटनेवाला धब्बा है। इसके लिए वहाँ के कुलपति उत्तरदायी रहे हैं और भ्रष्ट चरित्रवाले प्राध्यापकों का एक वर्ग।
अभी हाल ही मे एक ऐसी घटना घटी है, जिससे स्पष्ट होता है कि वहाँ के प्राध्यापकों का एक वर्ग शर्म और हया को घोलकर पी गया है।
ज्ञातव्य है कि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की ओर से पिछले १० दिसम्बर को आयोजित एक सौ दोवें दीक्षान्त-समारोह मे एक यूरोपीय छात्रा के स्वर्णपदक पाने के अधिकार को छीनकर एक ऐसी भारतीय छात्रा को दिया गया है, जो कहीं से भी उस स्वर्णपदक की हक़दार नहीं बनती। वास्तविकता तो यह है कि जिस छात्रा को स्वर्णपदक दिया गया है, वह सामाजिक विज्ञान-संकाय के अन्तर्गत ‘एम० सी० पी० आर०’ विभाग (डिपार्टमेण्ट ऑव़ मालवीय सेण्टर फॉर पीस रिसर्च) की है। शिकायत यह है कि प्रश्नपत्र बारह ‘जेण्डर कॉन्फ्लिक्ट ऐण्ड डीवेलपमेण्ट’ मे वह कथित छात्रा अनुत्तीर्ण है, फिर भी उसे सभी विषयों मे सर्वाधिक अंक देकर ‘स्वर्णपदक’ के लिए क्यों और किसने चुना है? उक्त विभाग के कतिपय प्राध्यापक उस छात्रा पर इतने मेहरबान क्यों हैं, अब इसकी जाँच ज़रूरी है।
बी० एच० यू० मे व्याप्त कदाचार की घटना यहीं पर नहीं थमती। वहाँ के इतिहास-विभाग का विद्यार्थी अनुज सिंह का कहना है कि उसका सी० जी० पी० ए० (क्यूमुलेटिव ग्रेड प्वाइण्ट एवरेज– संचयी श्रेणी-अंक-औसत) पूरे विभाग मे सबसे अधिक है; परन्तु उस विद्यार्थी का नाम ‘योग्यता-सूची’ से हटा दिया गया है। इसके लिए वह पिछले १० दिनो-सहित वहाँ के कुलपति-सहित सम्बन्धित सभी अधिकारियों के पास दौड़ता रहा; परन्तु उसकी सुधि किसी ने नहीं ली।
ऐसा प्रतीत होता है, मानो वहाँ भ्रष्ट, बेईमान तथा चरित्रहीन प्राध्यापकों का एक वर्ग मनबढ़ हो चुका हो। ऐसे मे, उपर्युक्त समस्त विसंगतियों की जाँच किसी स्वतन्त्र एजेंसी से कराने की आवश्यकता है।
देश के सभी समाचार-चैनल के ठीकेदार इस विषय पर मौन हैं।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १३ दिसम्बर, २०२२ ईसवी।)
◆ चित्र-विवरण– कुलपति-आवास से निराश लौटता छात्र अनुज सिंह