कुपोषण के खिलाफ़ छेड़ी गई मुहिम में लापरवाही के कारण बाल विकास परियोजना अधिकारियों का वेतन रोका गया

हरदोई- कुपोषण के खिलाफ छेड़ी गई प्रशासनिक जंग में लापरवाही करने वाले बाल विकास परियोजना अधिकारियों पर डीएम की कार्रवाई का डंडा चला है। परियोजना अधिकारियों के वेतन आहरण पर रोक लगाई गई है। कुपोषित बच्चों की देखभाल में इन लोगों ने लापरवाही बरती है।

जिला अधिकारी कार्यालय से जिला कार्यक्रम अधिकारी को लिखे गए पत्र में बताया गया कि कार्यक्रम विभाग को एसएम श्रेणी के बच्चों को चिन्हित कर पोषण पुनर्वास केन्द्र भेजे जाने का दायित्व दिया गया है। लेकिन पोषण पुनर्वास केन्द्र पर कई बेड खाली पड़े हैं। इसके साथ ही इलाकों में कुछ बच्चे कुपोषण का शिकार है। डीएम ने कहा कि इससे साफ जाहिर होता है कि बाल विकास परियोजना अधिकारियों की ओर से कुपोषण के खिलाफ छेड़ी गई लड़ाई में कोई रूचि नहीं ली जा रही है।  डीएम पुलकित खरे ने यह भी बताया कि काफी प्रयास के बाद पोषण पुनर्वास केन्द्र का विस्तारीकरण कराया गया। इसके साथ ही प्रदेश का पहला ऐसा जिला बनाया गया जहां पोषण पुनर्वास केन्द्र में 20 बेड मौजूद हैं।

डीएम से सीधे तौर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी व बाल विकास परियोजना अधिकारियों को प्रगति न होने का दोषी ठहराया है। जनपद में अभी भी एसएम श्रेणी के कई बच्चे हैं इसके बावजूद उनको पोषण पुनर्वास केन्द्र नहीं पहुंचाया गया। डीएम ने कहा कि 3 दिन में यदि सुधार नहीं किया गया तो शासन को आगे की कार्रवाई के लिए लिख दिया जाएगा। इसके साथ ही बाल विकास परियोजना अधिकारियों को तीन में ही स्पष्टीकरण देने की बात कही गई। अग्रिम आदेशों तक के लिए 20 परियोजना अधिकारियों के वेतन आहरण पर रोक लगा दी गई है। इस कार्रवाई से लापरवाह कर्मियों में खलबली मची हुई है।