आदित्य त्रिपाठी (प्रबन्ध सम्पादक IV24 NEWS) :
छात्रों के नाम पर राजनीति की रोटी सेंकने वालों क्या अब छात्रों का दर्द दिखाई नहीं देता ? विभिन्न शहरों में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र असहाय हैं । 5 किग्रा के गैस सिलेण्डर पर खाना बनाकर खाने वाले गैस खत्म होने पर कहां जाएं क्योंकि गैस रिफिल की दुकान बन्द, जेब में दैनिक खर्च नहीं, घर जाने के लिए साधन नहीं। उज्ज्वल भविष्य के स्वप्न आंखों मे लेकर वह अपने घर-परिवार से दूर शहर आए थे। पढ़-लिखकर प्रशासनिक सेवा, न्यायिक सेवा, चिकित्सकीय सेवा आदि में जाने का सपना देखने वालों को अनेक दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है ।
#दैनिकजागरण में छपी खबर पढ़कर मन बहुत व्यथित हुआ कि प्रयागराज में रहकर तैयारी करने वाले छात्रों का राशन खत्म हो गया है । दुकानें बन्द हैं । उनका सारा पैसा भी ख़त्म हो गया है, सभी किराए के कमरों में कैद हैं और उन्हें दो वक्त का भोजन भी नसीब नहीं हो रहा है फिर भी शासन-प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा है । यह छात्र देश का भविष्य हैं और देश के भविष्य पर संकट होने के बावजूद शासन-प्रशासन कुम्भकर्णी नींद सो रहा है । वाकई यह स्तब्ध कर देने वाला है । प्रयागराज तो मात्र उदाहरण है । लखनऊ, कानपुर आदि अन्य शहरों में रहकर तैयारी करने वाले छात्र भी इन्हीं अव्यवस्थाओं से जूझ रहे हैं । क्या यह जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की है, कुकुरमुत्तों की तरह उगे सामाजिक संगठनों की नहीं ? इस ओर गम्भीरता से ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है । सरकार सहित यह हम सबकी भी जिम्मेदारी है ।