महिला हॉकी विश्व कप : भारत सं०रा० अमेरिका के साथ ‘ड्रॉ’ खेलकर ‘नॉक-आऊट’ में पहुँचा

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
(प्रख्यात भाषाविद्-समीक्षक)

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (क्रीड़ा-समीक्षक)


भारत-संयुक्त राज्य अमेरिका का मैच १-१ से बराबर रहा। इस तरह भारत की महिला हॉकी-खिलाड़ियों ने विश्व कप के क्वार्टर फ़ाइनल में पहुँचने की आशा जीवित रखी है।


इंग्लैण्ड में खेले जा रहे ‘महिला हॉकी विश्व कप’ टूर्नामेण्ट के अन्तर्गत आज (२९ जुलाई, २०१८ ईसवी) भारत और संंयुक्त राज्य अमेरिका के मध्य खेले गये मैच में दोनों देशों की खिलाड़िनों ने शानदार खेल-प्रतिभा का प्रदर्शन किया था। यह मैच भारत के लिए अपेक्षाकृत अधिक महत्त्व का था; क्योंकि भारतीय दल को ‘नॉक-आऊट में पहुँचने के लिए यह मैच “करो अथवा मरो” का था। ‘पूल बी’ के अन्तर्गत खेल रहे भारतीय दल ने इंग्लैण्ड के विरुद्ध अनिर्णीत खेला था, जबकि ऑयरलैण्ड के विरुद्ध सर्वाधिक ७ ‘पेनल्टि कॉर्नर’ पाने के बाद भी कोई गोल नहीं कर सका था। अन्तत:, भारत पराजित हुआ था।


यहाँ भी भारत ने संयुक्त राज्य अमेरिका के विरुद्ध छ: ‘पेनल्टि कॉर्नर’ अर्जित किये थे, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका को मात्र तीन मिले थे, परन्तु भारत ने एक को छोड़कर शेष को व्यर्थ कर दिया था। भारत की कप्तान रानी रामपाल ने चौथे ‘पेनल्टि कॉर्नर’ को गोल में परिवर्त्तित किया था।


इस मैच में पहला गोल पहले हाफ में ही संयुक्त राज्य अमेरिका की ओर से हुआ था, जो कि ‘मैदानी गोल’ था। भारत की खिलाड़िनें लगातार संघर्ष कर रही थीं। पहले हाफ के पन्द्रह मिनट तक के प्रदर्शन में भारत की खिलाड़िनों की आक्रामक शैली और गति देखते ही बन रही थी। भारत की रक्षात्मक पंक्ति भी ग़ज़ब की थी। उसे मैदानी गोल करने के कई अवसर मिले थे, जो गोल में बदले जा सकते थे। खिलाड़ियों ने छोटे-छोटे पास देने में लापरवाही बरती थीं।


संयुक्त राज्य अमेरिका की खिलाड़िनों की भी आक्रमण और रक्षापंक्तियाँ प्रभावकारी थीं। उसकी गोलरक्षिका ने असरकारी प्रदर्शन किये थे।
भारत के लिए पहला हाफ सूखा रहा; अन्तत: दूसरे हाफ में भारत की ओर से एकमात्र गोल किया गया था, जो भारत को ‘विश्व कप’ में बनाये हुए है। बहरहाल, अब भारत अपने पूल में तीसरे स्थान पर पहुँच गया है।