डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
★ आप यदि सहमत हों तो ‘हाँ’ लिखें।
देश की जितनी भी शिक्षण-संस्थाएँ ‘हिन्दी-साहित्य’ के अन्तर्गत जिनके निर्देशन में शोधकर्म और परीक्षण करा रही हैं, उनकी भाषा, व्याकरण, भाषाविज्ञान तथा निर्धारित विषय से सम्बन्धित लिखित और मौखिक परीक्षाएँ की जानी चाहिए और जो असफल सिद्ध हों, उन्हें एक साल तक शोधनिर्देशन और परीक्षण के दायित्व से मुक्त रखा जाये। एक वर्ष-पश्चात् उनकी पुन: परीक्षाएँ की जायें; पुन: असफल रहने पर सदैव के लिए उन्हें शोधनिर्देशन और परीक्षण के अधिकारक्षेत्र से बाहर कर दिया जाये। ऐसा इसलिए कि आज ‘हिन्दी-साहित्य’ में स्नातकोत्तर की उपाधि अर्जित करनेवाले जो विद्यार्थी शोधकर्म में लगे हुए हैं और जिनके निर्देशन और परीक्षण में शोधकर्म किये जा रहे हैं, उनमें से अधिकतर अयोग्य हैं। इसे मैं सिद्ध कर सकता हूँ।
मैं इसे अपने सारस्वत मित्र, प्रखर कथाकार तथा केन्द्रीय मानव संसाधन मन्त्री डॉ० रमेश पोखरियाल निशंक जी के पास भी कल (९ अगस्त) भेजूँगा।
(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ८ अगस्त, २०१९ ईसवी)