विश्वास – जीवन की सबसे बड़ी शक्ति

राघवेन्द्र कुमार "राघव" प्रधान संपादक, इण्डियन वॉयस 24

विश्वास वह अदृश्य और अटूट डोर है,
जो टूटे मन को फिर जोड़ देती है।
जो अँधेरी रातों में भी
एक हल्की सी लौ बनकर
पथिक के कदमों को राह दे देती है।

विश्वास वह शक्ति है,
जिसका आलम्बन ले मनुष्य
विपरीत परिस्थितियों से टकरा सकता है।
जब समय की आँधी तेज़ हो जाती है,
और हालात के तूफ़ान झकझोर देते हैं,
तब यही विश्वास सीना तानकर कहता है।
डर मत, तू अकेला नहीं है।
तू तो अतुलित सामर्थ्यवान है।
तू सूर्य का दीप्त तेज है।
घबरा मत तेरे साथ सदैव भगवान है।

विश्वास वह दीप है जो बुझता नहीं,
चाहे कितनी भी तेज़ हवाएँ क्यों न हों।
वह वह हिम्मत है
जो घुटनों को थकने नहीं देती,
जो भीतर के टूटे सुरों को
फिर से संवार देती है,
और जीवन की संगीत-धारा
पुनः बहने लगती है।

कहा गया है—
“विश्वास हो तो पत्थर भी पानी बन जाता है,
और विश्वास न हो तो पानी भी पत्थर सा कठोर लगने लगता है।”

कुछ न होते हुए भी
बहुत कुछ पाया जा सकता है
यदि भीतर का विश्वास जीवित हो।
सूखी भूमि भी हरियाली बन सकती है,
बुझा दीपक भी फिर जल सकता है,
हारा हुआ मनुष्य भी
फिर एक नयी शुरुआत कर सकता है—
बस शर्त यही है
कि वह स्वयं पर भरोसा रखे।

उन्नति का पहला कदम
प्रतिभा नहीं—
विश्वास है।
कितने ही लोग तेज होते हुए भी
अपने मन में उठते संशयों से हार जाते हैं,
और कितने ही साधारण लोग
महान बन जाते हैं
क्योंकि उन्हें अपने प्रयासों पर
अटूट विश्वास होता है।

स्वयं पर विश्वास हो
तो रास्ते अनजाने नहीं लगते,
गिरना भी हार जैसा नहीं लगता।
और अपने लोगों पर विश्वास हो
तो जीवन की राहें
और अधिक सुरक्षित,
अधिक उजली,
अधिक सुगंधित हो उठती हैं।

अपने माता-पिता पर,
अपने गुरु पर,
अपने संग चलने वालों पर—
विश्वास रखने का अर्थ है
जीवन की नींव को
अडिग और स्थिर बनाना।

विश्वास से ही रिश्ते खिलते हैं,
विश्वास से ही सपने चलते हैं,
विश्वास से ही मनुष्य बढ़ता है—
और विश्वास से ही
स्वयं का निर्माण होता है।

अन्त में—
जीवन चाहे जितनी भी परीक्षाएँ ले,
कितने ही कठिन मोड़ क्यों न आएँ,
बस एक दीप सदैव जलाए रखना—
“मैं कर सकता हूँ…
मैं आगे बढ़ सकता हूँ…
और मेरा विश्वास
मुझे वहीं पहुँचाएगा
जहाँ मेरी नियति चमकती है।”

यही विश्वास
जीवन की वह शक्ति है,
जो अधूरे को पूरा कर देती है,
बिखरे को समेट लेती है,
और इंसान को
अपनी ही सीमाओं से ऊपर उठा देती है।