किसान छुट्टा जानवरों व बंदरों के आतंक से परेशान

कछौना, हरदोई। विकास खण्ड कछौना क्षेत्र के गांवों के किसान बंदरों व छुट्टा जानवरों के आतंक से परेशान है। बंदर घरों में घुसकर खाने का सामान उठा ले जाने के साथ ही खेतों में बोई गई सब्जियों व फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। बंदरों के आतंक के चलते काश्तकारों को खेतों से बीज का लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। वहीं छुट्टा पशुओं से किसान पहले ही परेशान हैं। जिम्मेदार बेपरवाह बने हुए हैं।

आवारा पशुओं से बचाव के लिए हालांकि कुछ गौशाला निर्माण की पहल की गई है, जिन ग्राम पंचायतों में अस्थाई गौ-आश्रय स्थल बने हुए हैं, लेकिन वहां पर भी पशुओं के झुंड खेतों में पहुंचकर लगी फसलों को नष्ट कर रहे हैं। किसान फसलों की रखवाली में दिन-रात जुटे रहते हैं। इसके बावजूद भी अपनी गाढ़ी कमाई की फसलों को नहीं बचा पा रहे हैं। जिसका जीता जागता उदाहरण ग्राम पंचायत महरी में बना अस्थायी गौ आश्रय स्थल है, महरी ग्राम पंचायत के किसानों को छुट्टा जानवरों से निजात दिलाने हेतु अस्थाई गौ-आश्रय स्थल संचालित है। परंतु गौ-आश्रय स्थल होने के बावजूद ग्राम पंचायत महरी के ग्राम सेमरा कलां, मढ़िया, अंटा, महरी, महमुदपुर, बिबिया पुर, सेमरा खुर्द में सैकड़ों की संख्या में झुंड के झुंड छुट्टा जानवर किसानों के खेतों में खड़ी फसलों को नष्ट कर रहे हैं।

छुट्टा जानवरों और बंदरों के आतंक से इससे कई किसानों ने खेती करना छोड़ दिया है। मढ़िया, लालपुर, जसवंतपुर, सेमरा कलां सहित कई गांवों के लोग आए दिन क्षेत्र में छुट्टा जानवर व बंदर झुंड बनाकर क्षेत्र में पहुंच रहे हैं। इससे काश्तकारों का खेती करना मुश्किल हो गया है। दर्जनों काश्तकारों को बन्दरों ने हमला कर घायल कर दिया। जिससे महीनों दौड़ भाग कर एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने पड़ते हैं। वहीं छुट्टा जानवर किसानों की फसल बर्बाद करने के साथ ही किसानों पर हमला कर घायल कर जीवन भर के लिए अपाहिज बना दे रहें हैं या मौत के घाट उतार देते हैं। क्षेत्र के किसानों ने शासन-प्रशासन से छुट्टा जानवरों/बंदरों के आतंक से निजात दिलाने की मांग की है, साथ ही समस्या का शीघ्र निराकरण न होने पर किसानों ने ब्लॉक मुख्यालय पर आंदोलन करने की बात कही है।