ग्राम पंचायतों में न्यायपूर्ण एवं निर्दोष त्रिकोणीय अर्थव्यवस्था की विशेषताएँ

किसी भी राज्य में प्रति ग्रामपंचायत स्तर पर त्रिकोणीय अर्थव्यवस्था के अंतर्गत सरकार की 33% हिस्सेदारी व 100% सहयोग से चलने वाले “सामाजिक उद्यम” की विशेषताएं–

1◆ सामाजिक उद्यम ग्राम पंचायत के समूह विशेष के सदस्यों द्वारा ग्रामपंचायत के उन्ही सदस्यों के लिए संचालित एक सामाजिक प्रयास होता है।

2◆ अकेले-अकेले उद्यम लगाना चलना प्रत्येक मनुष्य के लिए सम्भव नहीं अतः सामाजिक उद्यम उन कठिनाइयों का सरल समाधान है।

3◆ उद्यम को चार प्रकार के कर्मचारियों की जरूरत होती है। समाज मे वे चारो प्रकार के लोग मौजूद रहते हैं।

4◆ किसी एक ही व्यक्ति में चारों कर्मचारियों के गुण विद्यमान होना लगभग असंभव या नगण्य है। अतः एकाकी उद्यम सदैव दुःखद सिद्ध होता है।

5◆ प्यून, क्लर्क, मैनेजर, डायरेक्टर इत्यादि की भूमिका तो एकाकी उद्यम में एक ही व्यक्ति को निभानी पड़ती है या नौकर व गुलाम रखने पड़ते हैं जो अविश्वसनीय और कामचोर सिद्ध होते हैं जिससे कुछ समय बाद उद्यम डूबने लगते हैं।

6◆ सामाजिक उद्यम में सभी कर्मचारी मालिक होते हैं कोई भी नौकर या गुलाम नहीं होता। इसलिये प्रत्येक व्यक्ति अपनी भूमिका निष्ठापूर्वक खुद निभाता है। कामचोर, दुष्ट या अपराधी प्रवृत्ति वाले मनुष्यों को सामाजिक उद्यम की सदस्यता वर्जित है।

7◆ सामाजिक उद्यम सदैव लाभ और हानि से मुक्त रहते हैं क्योंकि इसमें उत्पादन का ही त्रिकोणीय वितरण (श्रमिक/पूँजीपति/सरकार या स्वयं सेवी संस्था का) होता है।

8◆ सामाजिक उद्यम में पूंजी पर कोई ब्याज, किराया, लाभ या हानि देय नहीं होती। वह ज्यों का त्यों सदैव स्थिर अथवा प्रतिष्ठित होती रहती है।

9◆ प्रत्येक ग्रामपंचायत में वहाँ के सार्वजनिक संसाधनों के अनुकूल एक या एक से अधिक सामाजिक उद्यम लगना अनिवार्य हो।

10◆ यह सामाजिक उद्यम राज्य के सभी ग्राम पंचायतों में एक न्यायपूर्ण एवं निर्दोष त्रिकोणीय अर्थव्यवस्था को जन्म देगा।

11◆ इस पंचायत स्तर के सामाजिक उद्यम में राज्य सरकार की 33% हिस्सेदारी के माध्यम से जनता के लिए 25% शिक्षा पर, 25% रोजगार पर, 25% सार्वजनिक सेवाओं-सुविधाओं जैसे सड़क, पीने का साफ़ पानी, बिजली, संचार, परिवहन व आवास इत्यादि, एवं 25% चिकित्सा, बीमा, बैंकिंग, पेंशन व सेल्टरिंग इत्यादि सेवाएं सर्वोपयोगी सीमा तक सहज ही सुलभ कराया जा सकेगा।

सामाजिक उद्यम के प्रभाव से उस राज्य के प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर में कोई अशिक्षित, बेरोजगार, बेघर, बीमार नहीं रहेगा।

सब लोग सद्गुणी, समृद्ध, सुखी और स्वस्थ जीवन का सौभाग्य प्राप्त करेंगे।

उम्मीद है मौजूदा सभी ईमानदार नियत व नीतियों पर विश्वास करने वाली राज्यसरकारें अपने राज्यों में भीषण पलायन को रोकने व बेरोजगार युवापीढ़ी को रोजगार के सुअवसर प्रदान करने हेतु उपरोक्त न्यायशील सामाजिक उद्यम योजना को कानूनी तौर पर लागू करेंगे व अपने प्रदेश के नागरिकों के चारों जनहिताधिकारो को संरक्षित करेंगे।

पिछले 75 वर्षीय राजनैतिक भारत के काल खंड में अब पहली बार ये उम्मीद जगी है कि भारत की इकलौती आम आदमी पार्टी जिसके मुखिया है अरविंद केजरीवाल जी हैं वे अवश्य ही इस न्यायशील कॉन्सेप्ट पर विचार ही नही करेंगे बल्कि इसपर शीघ्रातिशीघ्र कार्ययोजना भी बनायेंगे।

राम गुप्ता स्वतंत्र पत्रकार
अति साधारण कार्यकर्ता व प्रचारक
आम आदमी पार्टी, उत्तरप्रदेश