केदारेश्वर मंदिर पर बारहवीं श्रीराम कथा के पाँचवाँ दिवस

बेहंदर/हरदोई – बेहंदर कला के ग्राम प्रधान राजकुमार उर्फ राजू के द्वारा केदारेश्वर मंदिर पर बारहवीं श्री राम कथा के दौरान कथा का श्रवण कर रहे भक्तों को मिष्ठान वितरण किया एवं ईश्वर का आशीर्वाद लिया। कथावाचक अनिल पाण्डेय ने कहा कि कलयुग के समय एकमात्र साधन ईश्वर की आराधना ही है।

जिससे मनुष्य अपने अच्छे और बुरे कर्मों का फल भोगने के पश्चात स्वर्ग और नर्क में जाता है। इसलिए सदैव ईश्वर की आराधना करनी चाहिए और उनके बताए हुए मार्ग का कहीं अनुश्रवण करना चाहिए। जिससे मनुष्य के जीवन का उद्धार हो सके और वह मोक्ष को प्राप्त कर सके। “जैसे कि भगवान विष्णु ने पृथ्वी लोक पर अयोध्या नगरी के राजा दशरथ के पुत्र के रूप में श्री रामचंद्र भगवान जी ने माता कौशल्या के गर्भ से जन्म लेकर पृथ्वी लोक पर होने वाले घटनाक्रम को एक साधारण व्यक्ति की भाँति जीवन यापन करते हुऐ अपने जीवन में अनेकों कष्टों का सहन किया और सदैव सच्चाई के ही मार्ग पर चलते हुए बुराई का नाश किया। इससे स्पष्ट होता है कि ” मनुष्य के योनि में जन्म लेने वाले समस्त मनुष्यों को सदा ही उनके बताए हुए मार्गों का ही अनुसरण करना चाहिए। ” जिससे उसका जीवन सफल एवं सार्थक हो सके।

“कद्रू बनितिह दीन दुख तुमहि कौसिला देब, भरत बंदि गृह सेइहहि लखन राम के नेब”
भगवान श्री राम चंद्र जी का चौदह बरस का वनवास हुआ भगवान श्री राम गंगा पार करके भरद्वाज के आश्रम से बाल्मीकि जी के आश्रम पर आए बाल्मीकि जी ने भगवान से कहा प्रभु आपने बहुत ही बड़ी दया की है।

सोइ जानइ जेहि देहु जनाई, जानत तुम्हहि तुम्हहि होई जाई
श्री रामचंद्र जी ने कहा प्रभु हमारे लिए स्थान बताइए । तो वाल्मीकि जी ने राम जी से कहा प्रभु–
“तुम्हहि निवेदित भोजन करही प्रभु प्रसाद पट भूषण धरही”
“जिन्हके कपट दंभ नहि माया तिन्हके ह्रदय बसहु रघुराया ।।”

भगवान राम से कहा प्रभु चित्रकूट का पावन स्थान ही आपके लिए सही है । तब भगवान श्री राम जी चित्रकूट आए । चित्रकूट से सभी संत महात्माओं से मिलते हुए शबरी के धाम आए और नवधा भक्ति का ज्ञान दिया । शबरी के आश्रम से भगवान पंपापुर सरोवर की ओर चले वहां पर देव ऋषि नारद जी मिले । नारद जी ने भगवान राम से कहा–
“प्रभु तब मैं विवाह चह कीन्हा, केहि कारन प्रभु करै न दीन्हा”।
भगवान ने नारद जी से कहा जिस प्रकार से अपने बच्चे को मां खाने पीने के लिए उसकी रक्षा करने के लिए हर वक्त माता तत्पर रहती है, उसी प्रकार से नारद जी से श्री रामचंद्र जी ने कहा–
“काम क्रोध लोभादि मद प्रबल मोह कै धारि, तिन्ह मह अति दारून दुखद माया रूपी रूपी नारी।”
वहां से राम जी आगे बढे तो हनुमान जी विप्र बनकर राम जी से परिचय लिया। रामकथा के इस प्रसंग को सुनकर आए हुए दूर-दूर से सभी भक्त प्रेम विभोर हो गए।

इस शुभ अवसर पर बेहंदर कला के ग्राम प्रधान और केदारेश्वर मंदिर के अध्यक्ष श्री श्री दिगंबर 108 स्वामी सत्यानंद गिरी महाराज खड़े श्री नागा बाबा संत मंत परमहंस आश्रम योगाभ्यास सतगुरु सेवा समिति दिल्ली के निवासी गुरु जी के द्वारा ग्राम वासियों को आशीर्वाद प्रदान किया गया। कथा के आयोजन कर्ता देवी शरण, राम कुमार, राजकुमार उर्फ राजू सोनी प्रधान बेहंदर कला, इंद्र कुमार, हरिराम, हरि श्याम,अनुज एवं समस्त ग्राम वासियों एवं क्षेत्रवासियों ने भगवान शिव और श्री रामचंद्र जी की महिमा को सुना।