‘मुक्त मीडिया’ का ‘आज’ का सम्पादकीय
आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
आज (२० जनवरी) की तिथि विश्व के सर्वाधिक शक्तिशाली देश संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए सुख और गर्व का विषय है, वहीं दु:ख और शोचनीय भी। सुख और गर्व का विषय इसलिए कि आज संयुक्त राज्य अमेरिका के वासियों को ७१ वर्षीय जो बाइडेन के रूप में एक अनुभव-सम्पन्न और गम्भीर छियालीसवीं राष्ट्रपति मिला है; और वह भी तीसरे प्रयास में, जबकि दु:ख और शोचनीय विषय यह है कि निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनी दूषित और रुग्ण मानसिकता के चलते संयुक्त राज्य अमेरिका की संसद् में जिस तरह का राष्ट्रघातक आक्रमण कराया था, वह संयुक्त राज्य अमेरिका के इतिहास में पहली और नितान्त भर्त्सनीय घटना बन चुकी है, जिसकी विश्व में निन्दा की जा रही है।
वैसा दुर्दान्त आतंकवादी कृत्य तृतीय विश्व (विकासशील देश) के किसी भी देश में नहीं हुआ है। होना तो यह चाहिए था कि लोकतान्त्रिक पद्धति से सम्पन्न राष्ट्रपति-चुनाव में जो बाइडेन को स्पष्ट बहुमत प्राप्त हो चुका था तब डोनाल्ड ट्रम्प को नौटंकी नहीं करनी चाहिए थी।
बहरहाल २० जनवरी, २०२१ ईसवी को भारतीय समयानुसार रात्रि १० बजकर ११ मिनट पर कमला हैरिस को उपराष्ट्रपति को शपथ ग्रहण कराया गया था। उससे पहले मशहूर गायिका लेडी गाबा ने संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रगान का गायन किया था। इस प्रकार वे एशियाई-अफ़्रीकी मूल की महिला के रूप में प्रथम उपराष्ट्रपति नियुक्त हुई हैं। इस अवसर पर चर्चित विश्व-गायिका लोपेज ने गायन किया था। भारतीय समयानुसार रात्रि में ठीक १० बजकर १७ मिनट पर जो बाइडेन ने ‘बाइबिल’ पर हाथ रखकर राष्ट्रपति-पद का शपथ ग्रहण किया था। उस समय लगभग २५ हज़ार सैनिक शपथग्रहण-समारोह में किसी भी अप्रिय आशंका के कारण तैनात किये गये थे। उनके साथ संयुक्त राज्य अमेरिका की प्रथम महिला और जो बाइडेन की पत्नी जिल हैं, उपस्थित रहीं। निवर्तमान डोनाल्ड ट्रम्प शपथग्रहण-समारोह में उपस्थित नहीं थे। इस प्रकार १५२ वर्षों की परम्परा भंग हुई थी।
नव नियुक्त दूसरे कैथोलिक राष्ट्रपति जो बाइडेन ने शपथ ग्रहण के उपरान्त सम्बोधित करते हुए कहा था :– आज अमेरिका का दिन है। आज लोकतन्त्र का दिन है। हमारी जीत लोकतन्त्र की जीत है। मैं सभी अमेरिकियों का राष्ट्रपति हूँ। मैं सभी अमेरिकियों का धन्यवाद करता हूँ। मैं उस पूर्व राष्ट्रपति (ट्रम्प) का भी धन्यवाद करता हूँ, जो इस समारोह में उपस्थित नहीं हुए। हिंसा से लोकतन्त्र कमज़ोर होता है। हम हिंसा की राजनीति को दूर रखें। हमें कोरोना-काल में एक साथ मिलकर लड़ना है। हम नस्लीय भेदभाव से लड़ेंगे। यह उत्सव का वातावरण है। हमें एकजुटता का परिचय देना होगा। आज हमारे लिए परीक्षा का समय है और हम उसमें सफल होकर दिखायेंगे। हम अमेरिका के लिए ऐतिहासिक कार्य करेंगे। हमें इतिहास ने हमें एक साथ रहना सिखाया है। हमारे देश का संविधान अत्यन्त सुदृढ़ है। हमें लोकतन्त्र की रक्षा करनी होगी। हम अमेरिका के इतिहास में नया अध्याय लिखेंगे। अमेरिका में सभी को सम्मान मिलेगा।
नव-नियुक्त राष्ट्रपति जो बाइडेन के उद्घाटन के पश्चात् करतल ध्वनि के साथ स्वागत किया गया।
यहाँ उल्लेखनीय है कि संयुक्त राज्य अमेरिका के सर्वाधिक अवस्थावाले (७८ वर्षीय) जो बाइडेन ने अपने प्रथम संभाषण में लोकतन्त्र के प्रति अपनी गहरी आस्था व्यक्त की थी। उन्होंने वैश्विक एकता के प्रति भी अपना आशावादी दृष्टिकोण से विश्व को अवगत कराया। जिस रंगभेदी नीति के कारण संयुक्त राज्य अमेरिका बदनाम रहा है, उस नस्लीय नीति पर ज़ोरदार प्रहार करते हुए जो बाइडेन ने सभी को साथ लेकर चलने का आह्वान किया था। उनका यह कहना– मैं सभी अमेरिकियों का राष्ट्रपति हूँ, उनकी समदर्शिता को सुस्पष्ट करता है।
उल्लेख्य है कि १९३७ ई० से २० जनवरी को ही राष्ट्रपतिपद के लिए शपथग्रहण-समारोह होता आ रहा है।
यह भी महत्त्वपूर्ण है कि जो बाइडेन ने भारत-मूल के अनेक विशेषज्ञों को अपने साथ सक्रिय भूमिका में जोड़ा है, जिनमें नीरा टण्डन, डॉ० विवेक मूर्ति, वनिता गुप्ता, उजरा जेया, सोनिया अग्रवाल, विदुर शर्मा, तरुण छाबड़ा, सुमोना गुहा, शान्ति कला, विनय रेड्डी आदिक सम्मिलित हैं। इससे जो बाइडेन का भारत के प्रति सुमधुर आचरण प्रतिबिम्बित हो रहा है।
आनेवाला समय भारत-संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए शुभकारी होगा, जो वाइडेन के व्यावहारिक पक्ष इसकी संस्तुति कर रहा है।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २० जनवरी, २०२१ ईसवी।)