भूगर्भ जल के संरक्षण एवं प्रबंधन हेतु ग्राउंड वाटर (मैनेजमेंट एंड रेगुलेशन) बिल-2017 हो रहा तैयार

उत्तर प्रदेश में भूगर्भ जल के संरक्षण एवं प्रबंधन के लिए ग्राउंड वाटर (मैनेजमेंट एंड रेगुलेशन) बिल-2017 तैयार किया जा रहा है। भारत सरकार द्वारा परिचालित मॉडल ग्राउंड वाटर (सस्टेनेबल मैनेजमेंट) बिल-2016 में प्रदेश की स्थानीय आवश्यकताओं एवं भूगर्भ जल परिस्थितियों को समावेश करते हुए बॉटम-अप-अप्रोच पर प्रदेश में एक्ट लागू करने कार्यवाही की जा रही है।
प्रमुख सचिव, लघु सिंचाई एवं भूगर्भ जल, श्रीमती मोनिका एस गर्ग ने बताया कि भू-जल संपदा के कुशल प्रबंधन एवं नियोजन करने के लिए इस अधिनियम को लाने की कार्यवाही की जा रही है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के 172 विकास खंड समस्याग्रस्त है। इनमें से 113 विकासखंड अतिदोहित, 59 विकासखंड क्रिटिकल और 45 विकासखंड सेमीक्रिटिकल श्रेणी में वर्गीकृत किए गए हैं। वर्ष 2000 में समस्याग्रस्त विकासखंडों की संख्या मात्र 45 थी जो लगभग नौ गुना बढ़कर वर्तमान में 172 पहुंच चुकी है। श्रीमती गर्ग ने बताया कि बिल में प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार भूगर्भ जल के व्यवसायिक, औद्योगिक एवं थोक उपभोक्ताओं को पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। इनके लिए भूजल निकास की सीमा निश्चित होगी। भूजल निकास की मात्रा के अनुसार शुल्क वसूल किया जाएगा। भूजल निकासी के लिए इन्हें अनापत्ति प्रमाणपत्र भी जारी किए जाएंगे।
जनता की सहूलियत के लिए कृषि एवं अन्य घरेलू उपभोक्ता को केवल आनलाइन सूचना ही देनी होगी। प्रमुख सचिव ने बताया कि बिल में भूजल प्रदूषण की रोकथाम, स्वविनियमन, वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज, जल भराव की रोकथाम इत्यादि के उपाय किए गए हैं। भूजल एक्ट में वर्णित प्रावधानों के उल्लंघन की स्थिति में दंड की व्यवस्था का भी प्रस्ताव किया गया है। बिल में दिए गए प्रावधान में किसी भी विवाद के निपटारे के लिए भूजल शिकायत निवारण प्रकोष्ठ की भी व्यवस्था की गई है।