“आप हिन्दीभाषा के अन्तर्गत जिन शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं, वे तब तक मान्य हैं जब तक उनमें कोई विकार उत्पन्न नहीं होता। इसके लिए सबसे उत्तम मार्ग यह है कि आप अपनी कार्य-प्रविधि के अन्तर्गत सरलतम पारिभाषिक शब्दों का प्रयोग करें; किन्तु उनमें अशुद्धि न रहे। हमें नहीं भूलना चाहिए कि हिन्दी विश्व की सर्वाधिक वैज्ञानिक भाषा है। इसके साथ छेड़खानी घातक सिद्ध होती है।”

उक्त विचार भाषाविद्-समीक्षक डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने ‘भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण’ की ओर से ‘नागर विमानन प्रशिक्षण कॉलेज’, बमरौली, प्रयागराज के समस्त विभागाध्यक्षों और अन्य कार्मिकगण के समक्ष ‘शासकीय कार्यों में सरल, सुबोध एवं शुद्ध हिन्दी-प्रयोग’ विषय पर कॉलेज-सभागार में १९ सितम्बर को दो सत्रों में आयोजित एकदिवसीय हिन्दी-कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किये थे। उन्होंने ‘हिन्दी-पखवाड़े’ के अन्तर्गत भाषा-अर्थ और अवधारणा का विवेचन करते हुए शासन-प्रशासनस्तर पर अशुद्ध और अनुपयुक्त शब्दों को कैसे पहचानें और उनके प्रयोग से कैसे बचें, इसके प्रति सजग रहते हुए, दायित्व-निर्वहन करने पर बल दिया था। डॉ० पाण्डेय ने पचास से अधिक गलत प्रयोग किये जा रहे शब्दों को उनकी रचना के साथ सही प्रयोग बताये, सिखाये तथा लिखाये।
उन्होंने सभागार में उपस्थित प्रशिक्षणार्थियों के प्रश्नों-प्रतिप्रश्नों के उत्तर देकर सभी को सन्तुष्ट किये। आरम्भ में मुख्य अतिथि डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय और उक्त प्रशिक्षण कॉलेज के प्रधानाचार्य अतुल दीक्षित ने दीप-प्रज्वलन कर कार्यशाला का उद्घाटन किया था। स्वागत करते हुए प्रधानाचार्य श्री दीक्षित ने कहा, “आप सभी लिखने-बोलने में अशुद्धियाँ दूर करें। अशुद्धियाँ प्रयोग करने पर वे रूढ़ हो जाती हैं।” संयुक्त प्रबन्धक (ए०टी०एम०) सुभाष कुमार ने कहा, “ख़ुशी की बात है कि हिन्दी-पखवाड़े का आयोजन किया गया है। इस कार्यशाला में आपको बहुत-कुछ सीखने को मिलेगा।” संयुक्त प्रबन्धक (संचार) सुमन भूटानी ने बताया, “जिस समय आज़ादी की लड़ाई लड़ी जा रही थी तब हरेक की ज़बान पर हिन्दी थी। वह आज भी राजभाषा के रूप में पल्लवित है।” इनके अतिरिक्त सहायक महाप्रबन्धक (सिविल) आर०आर० पाण्डेय ने ‘तकनीकी कार्यों में हिन्दी का प्रयोग’, देवकान्त पाण्डेय ने ‘आधुनिक इ० टूल्स के माध्यम से राजभाषा का क्रियान्वयन्’ तथा अमरेन्द्र कुमार चौधरी ने ‘राजभाषानीति’ पर व्याख्यान किये थे। कार्यशाला का संचालन-संयोजन सहायक प्रबन्धक (राजभाषा) देवकान्त पाण्डेय ने किया। वरिष्ठ प्रबन्धक (राजभाषा) अमरेन्द्र कुमार चौधरी ने आभार-ज्ञापन किया था।