भारतीय संस्कृति का प्रतीक है होली

डॉ. राजेश कुमार शर्मा पुरोहित

फाल्गुन मास में होली प्रतिवर्ष बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है। हिन्दुओं के प्रमुख त्योहारों में होली का विशेष महत्व है। होली का त्योहार वैदिक काल से मनाया जाता है। यह रंगों का त्योहार है। सभी समुदाय के लोग इस त्योहार को उल्लास व प्रेम के साथ मनाते हैं। घरों में स्वादिष्ट व्यंजन बनाये जाते हैं। होली का त्योहार आपसी भाईचारे का त्योहार है। इस दिन आपस मे गले मिलकर एक दूसरे को रंग गुलाल लगाते हैं। इस दौरान चंग ढोल ढपली पखावज अलगोजा आदि वाद्य यंत्र बजाये जाते हैं। फ़ाग गीत टोलियां बनाकर गाये जाते हैं। बृज की लट्ठमार होली को देखने देश विदेश से लोग आते हैं। बरसाना नंदगांव मथुरा वृंदावन  में एक पखवाड़े तक होली के रंगों से राधा कृष्ण की होली चलती है। बृज की होली में लठमार होली में पुरुष महिलाओं पर रंग डालते हैं। और महिलाएं पुरुषों को लाठियां तथा कपड़े के बनाए गए कोड़ों से मारती है। कुमायूँ में होली पर शास्त्रीय संगीत की गोष्ठियां की जाती है। हरियाणा में धुलेंडी में भाभी द्वारा देवर को सताए जाने की प्रथा है। विदेशी इस्कॉन टेम्पल को सजाते हैं। राधा कृष्ण का सुंदर श्रंगार करते हैं। विश्व प्रसिद्ध कृष्ण मंदिर वृंदावन में बांके बिहारी जी का माना जाता है ।

होली अनेकता में एकता को दर्शाती है विविधता में एकता भारत की विशेषता है जो होली पर नज़र आती है। प्रेमरंगों से पगी होली आपसी अपनत्व की होली ही वास्तविक होली है ।
होली का त्योहार क्यों मनाया जाता है।इसके पीछे छिपा एक इतिहास है। हिरण्यकश्यप नाम का एक असुर था। उसकी बहन होलिका बड़ी दुष्ट थी।हिरण्यकश्यप भक्त प्रह्लाद को मारना चाहता था क्योंकि वह भगवान विष्णु का परम भक्त था लेकिन हिरण्यकश्यप स्वयं को भगवान समझता था। उसने प्रह्लाद को विष्णु भक्ति करने से रोका।लेकिन प्रह्लाद भगवान विष्णु के प्रति पूर्ण समर्पित था उनका एक ही ईश्वर था विष्णु। जब प्रह्लाद हिरण्यकश्यप की बात को मानने के लिए तैयार नहीं हुआ तो असुर हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को मारने की योजना बनाई उसने हाथी से मरवाया। गर्म तेल के कड़ाह में डाल दिया। ऊँचे पहाड़ से गिराया।भगवान की कृपा से भक्त प्रह्लाद बच गए। फिर भी हिरण्यकश्यप ने हार स्वीकार नहीं की। हिरण्यकश्यप की बहिन होलिका को भगवान शंकर से ऐसी चादर मिली थी कि जिसे ओढ़ने पर अग्नि उसे जला नहीं सकती थी। होलिका उस चादर को ओढ़कर हिरण्यकश्यप के कहे अनुसार भक्त प्रह्लाद को गोद मर लेकर चिता में बैठ गई ।देवयोग से वह चादर उड़कर प्रह्लाद के ऊपर आ गई। दुष्ट होलिका अधर्म रूपी होलिका अग्नि में जलकर भस्म हो गई। धर्म रूपी सत्य रूपी पहलाद बच गया। इस प्रकार होलिका दहन के दिन होली जलाकर होलिका नामक दुर्भावना का अंत किया जाता है। भगवान विष्णु द्वारा भक्त की रक्षा का जश्न मनाया जाता है।

मान्यता है कि होली पर यदि किसी व्यक्ति को लाल रंग का गुलसल लगाया जाए तो सभी तरह के मनभएफ और मतभेद दूर हो जाते हैं। क्योंकि लाल रंग प्यार सौहार्द का प्रतीक होता है।

होलिका दहन के दिन एक पवित्र अग्नि जलाई जाती है।जिसमें सभी तरह की बुराई अहंकार और नकारात्मकता को जलाया जाता है। होली पर अपने मित्रों परिजनों को गुलाबी पीला हरा लाल रंग लगाते हैं। नाचते गाते हसन लजीज व्यंजन बनाते हैं।

-डॉ. राजेश कुमार शर्मा पुरोहित
कवि/साहित्यकार, भवानीमंडी, राजस्थान