‘हिन्दू-मुसलमान’ के नाम पर कब तक आग लगाते रहोगे

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- 


कासगंज (उत्तरप्रदेश) इन दिनों साम्प्रदायिकता की आग में धधक रहा है और वहाँ का प्रशासन पर्याप्त सुरक्षाबल उपलब्ध होने की बात करने के बाद भी उपद्रवियों पर अंकुश लगाने में असफल सिद्ध हो रहा है।
ज्ञातव्य है कि २६ जनवरी को कासगंज में उपद्रव करते हुए, ‘तिरंगा-यात्रा’ निकालने से वहाँ तनाव उत्पन्न हो गया था, फिर देखते-ही-देखते उस यात्रा ने कब साम्प्रदायिकता का रूप ले लिया, यह तब पता चला जब वहाँ ‘हिन्दू बनाम मुसलमान’ की आग भड़क उठी। गोलीबारी में चन्दन गुप्ता (स्नातक का विद्यार्थी) मारा गया था। उस घटना में दो व्यक्ति भी लापता हैं। घटना के दौरान कर्फ़्यू भी लगा दिया गया था, जो अब भी लगा हुआ है। चन्दन के अन्तिम संस्कार करने के बाद लौटती भीड़ को हिंसा भड़काते हुए देखा गया था परन्तु पुलिस-बल वहाँ भी नाकाम साबित हुई।
आश्चर्य है, मीडियाकर्मी दिखा रहे हैं कि पानी के बोतल में पेट्रोल और मोबिल ऑयल लेकर गलियों से निकलकर गुण्डे घूम रहे हैं और आसानी से कहीं भी आग लगाकर भाग जा रहे हैं, परन्तु सुरक्षा-प्रशासन हाथ-पर-हाथ धरे बैठा हुआ है।
आज फिर वहाँ के कई क्षेत्रों में विध्वंसक कृत्य किये जा रहे हैं : कई वाहनों में आग लगा दी गयी है; कुछ घर जला दिये गये हैं; इस समय भी उपद्रवी दूकानों में आग लगाये जा रहे हैं, जबकि वहाँ पर्याप्त पुलिस-बल होने के बाद भी अराजक तत्त्वों पर नियन्त्रण करने में वह बल पूरी तरह से बौना सिद्ध हो रहा है! एक पेट्रोल पम्प के ठीक सामने आज एक बस जला दी गयी है। यदि पेट्रोल पम्प में आग लग जाती तो क्या होता?
भारतीय जनता पार्टी का सांसद राजबीर का वीडियो सामने आया है, जिसमें वह कह रहा है : चन्दन गुप्ता ‘हमारा लड़का’ था, जबकि मृतक के पिता का कहना है : चन्दन का किसी राजनीतिक पार्टी से कोई सम्बन्ध नहीं था; वह तिरंगा-यात्रा में शामिल था और ‘वन्देमातरम्’ कह रहा था; उसी समय उसे गोली मार दी गयी। चन्दन के पिता ने फ़िलहाल, मीडिया के कैमरे पर स्पष्ट कर दिया है : मैं अपने पुत्र की हत्या की जाँच कराना नहीं चाहता; जो हो गया, सो हो गया। उस पर कोई राजनीति न करे।
नियमत: इस तरह की कोई भी यात्रा अथवा जुलूस निकालने के लिए ज़िला-प्रशासन से अनुमति ली जाती है,
परन्तु कासगंज के ज़िलाधिकारी राजेन्द्र प्रताप का स्पष्ट रूप में कहना है,”तिरंगा-यात्रा निकालने के लिए कोई अनुमति नहीं ली गयी थी।
इन सारी घटनाओं की कोख से कई प्रश्न उत्पन्न होते हैं :—
१- बिना अनुमति के ‘तिरंगा-यात्रा’ कैसे निकाली गयी?
२- उस यात्रा का नेतृत्व कौन कर रहा था?
३- चन्दन गुप्ता को किसने और क्यों गोली मारी थी?
४- कर्फ़्यू लगाने के बाद भी उपद्रवी कहाँ से आकर आगज़नी की घटनाएँ करके कैसे भाग जा रहे हैं?
५- यदि पर्याप्त सुरक्षाबल है तो उपद्रवियों पर नियन्त्रण करने में वह सुरक्षाबल असफल सिद्ध क्यों हो रहा है?
६- मुसलमानों के गुट का कहना है : हम भी तिरंगा झण्डा फहरा रहे थे तब हमें ‘भगवा झण्डा’ लहराने के लिए बाध्य किया जा रहा था, जबकि हिन्दुओं के गुट का कहना है : मुसलमान ‘पाकिस्तान ज़िन्दाबाद’ का नारा लगा रहे थे, ऐसे में, सच की पड़ताल कौन और कैसे करेगा?
७- हिंसा की घटना के बाद से जो दो व्यक्ति लापता हैं, उनका इस घटना के साथ क्या सम्बन्ध है और वे दोनों इस समय कहाँ हैं?
८- भारतीय जनता पार्टी का सांसद राजबीर मृतक चन्दन गुप्ता को ‘हमारा लड़का’ कह रहा है; साथ ही यह भी कि चन्दन की हत्या की जाँच यहाँ नहीं, ‘बाहर’ की जायेगी, जबकि चन्दन के पिता के अनुसार, उनका बेटा किसी भी राजनीतिक दल से सम्बन्धित नहीं था और वह हत्या की जाँच भी नहीं चाहते। उन्होंने यह भी कहा था : चन्दन की हत्या को लेकर कोई राजनीति न की जाये। ऐसे में, इसकी जाँच कौन करेगा : सांसद सच बोल रहा है अथवा मृतक का पिता सच कह रहा है? चन्दन गुप्ता की पृष्ठ और पार्श्वभूमि क्या थी?
बहरहाल, इस घटना को हिन्दू-मुसलमान की भावनाओं से जोड़कर देखने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि प्रत्येक दशा में मनुष्यता ही प्रभावित होती है। इसे अब राजनीतिक रंग देने के स्थान पर घटना के प्रत्येक पक्ष पर दृष्टि में वस्तुपरकता लाते हुए, अति संवेदनशीलता और गम्भीरता के साथ दृष्टिनिक्षेपित करते हुए, घटना का परीक्षण कर, अपराधियों को कठोर दण्ड दिलाने की आवश्यकता है, ताकि जनसामान्य के जीवन को अस्त-व्यस्त करनेवाली हिंसात्मक कृत्यों की पुनरावृत्ति न की जा सके।

(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, इलाहाबाद; २८ जनवरी, २०१८ ई०)