राघवेन्द्र कुमार राघव-
नया साल नया संकल्प स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत ।
स्वच्छता और मानसिकता साथ ही चलते हैं । किसी और पर स्वच्छता के लिए आश्रित होना तो एक तरह से पाप है । समाज का चरित्र तो सदैव से दोहरा रहा है । एक ओर वह बहुत सारी बातों का निषेध करता है वहीं लाभ की स्थिति में उन्हीं विकृतियों को अंगीकार करता है ।

कुएँ के भीतर उतरे गंगाराम (दाएं) और लवकुश (बाएं)
आज एक प्राचीन कुएँ की सफाई के दौरान भी ऐसा ही कुछ हुआ । जब हरदोई जिले के बालामऊ गाँव में एक बहुद्देशीय सूखे पड़े कुएँ को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा था तो एक प्रश्न गाँव के ही शिवकुमार सोनी ने किया कि जिस समाज में खाली बाल्टी को देखना अशुभ माना जाता हो वहाँ सूखा कुआँ पावन कैसे और भी तब जब विवाह में वरयात्रा से पूर्व इस कुएँ को ब्याहने की प्रथा है ? यह सोलह आने सच बात अपने आप में समाज की एक स्याह सच्चाई समेटे हुए है । कुआँ सूखे छः साल से अधिक हो गया है और इस बीच सौ से ज्यादा बार दूल्हे इस कुएँ को, माफ़ करना सूखे कुएँ को ब्याह चुके हैं लेकिन किसी को अपशगुन का विचार नहीं आया । वहीं पड़ोसी की खाली बाल्टी को देखकर पारा चढ़ जाता है । लोगों का सोचना भी सही है अब कुआँ साफ़ करना तो उनका काम है नहीं । रही बात सरकार की क्योंकि प्राकृतिक जल स्रोतों को बचाने के लिए वह बहुत बड़ी धनराशि ख़र्च करती है, तो उसका काम तो कागज़ी या फिर मीडिया अटेंशन के लिए होता है । यहां गाँव में मीडिया के कैमरे ब्रेकिंग कैसे बनाते ?
चार मीटर व्यास और तीस फीट की गहराई का चार-पाँच सौ साल पुराना कुआँ आधुनिक संसाधनों के अभाव में साफ़ करना और जल स्रोत खोलना अतिदुष्कर और जान जोखिम में डालने का काम था । लेकिन ग्राम पंचायत द्वारा अपने दायित्वों की उपेक्षा के पश्चात ग्राम के उत्साही नवयुवकों ने गाँव की पहचान से जुड़े माँ दुर्गा मन्दिर के कुएँ की सफाई की । इस पुनीत कार्य में दो दर्जन से अधिक जिम्मेदार ग्रामीणों ने योगदान दिया । अपनी जान व सेहत की परवाह न करते हुए गाँव की प्राचीन धरोहर व पहचान को बचाने गंगाराम, लवकुश और धर्मेन्द्र कुएँ के भीतर उतरे । धीरेन्द्र कुमार ‘संजय’, आदित्य त्रिपाठी ‘यादवेंद्र’, सुबोध, रवि कुमार, जिशान, रजत, शनि कुमार (पिनकाई), सोनू, शिवकुमार, सन्दीप, सुन्दरलाल, अरविंद, अशोक, सुशील, सन्दीप सविता आदि ने कुएँ की गाद (सिल्ट) निकालने में सहयोग किया एवम् श्रीकृष्ण, सत्यपाल आदि बुजुर्गों ने युवाओं को प्रेरित करने के साथ मार्गदर्शन किया । करीब चार घंटे के अथक व अकथ परिश्रम के बाद कुएँ को पुनर्जीवित कर दिया गया । चारों ओर के जल स्रोतों से जल निकलने लगा । सभी ने इन युवाओं के नववर्ष के मनाने के तरीके को सराहा और सभी को शाबाशी दी ।