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भारत, अफगान सरकार और तालिबान के बीच बातचीत में तेजी लाने के सभी प्रयासों का समर्थन: एसo जयशंकर

(शाश्वत तिवारी)

अफगानिस्तान में स्थाई शांति के लिए आतंकियों को सुरक्षित पनाह देना तुरंत खत्म किया जाना चाहिए, साथ ही उनकी सप्लाई चेन को भी तोड़ा जाना चाहिए। विदेश मंत्री एसo जयशंकर मंगलवार को अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बहस में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने सीमा पार आतंकवाद समेत आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की जरूरत पर जोर दिया।

अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बहस में बोल विदेश मंत्री एसo जयशंकर

जयशंकर ने कहा कि हिंसा में तत्काल कमी और असैन्य नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये भारत अफगानिस्तान में स्थाई संघर्ष विराम चाहता है। उन्होंने कहा कि “यह सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि अफगानिस्तान के क्षेत्र का इस्तेमाल आतंकवादी समूहों द्वारा किसी अन्य देश को धमकाने या हमला करने के लिए न किया जाए। पाकिस्तान की तरफ इशारा करते हुए जयशंकर ने कहा कि “आतंकवादी संगठनों को साजो-सामान और आर्थिक मदद पहुंचाने वालों को निश्चित रूप से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

जयशंकर ने कहा कि अफगानिस्तान में हिंसा केवल बढ़ी है, खासकर एक मई के बाद यह हिंसा बढ़ी है और देश में धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों, छात्राओं, अफगान सुरक्षा बलों, उलेमाओं, पत्रकारों, नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं और युवाओं को निशाना बनाकर हमले हुए हैं, इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय और विशेष रूप से, यह परिषद हिंसा में तत्काल कमी सुनिश्चित करने के लिए एक स्थाई संघर्ष विराम और नागरिकों के जीवन की सुरक्षा के लिए दबाव डाले।

जयशंकर ने कहा कि भारत, अफगान सरकार और तालिबान के बीच बातचीत में तेजी लाने के लिए किए जा रहे सभी प्रयासों का समर्थन करता रहा है, जिसमें अंतर-अफगान वार्ता भी शामिल है। उन्होंने कहा कि “भारत एक वास्तविक राजनीतिक समाधान और अफगानिस्तान में एक व्यापक और स्थायी युद्धविराम की दिशा में बढ़ाए गए किसी भी कदम का स्वागत करता है। हम संयुक्त राष्ट्र की अग्रणी भूमिका का समर्थन करते हैं, क्योंकि इससे स्थायी और टिकाऊ परिणाम में आने वाली बाधाओं को दूर करने में मदद मिलेगी।

जयशंकर ने कहा कि मैं एक समावेशी, अफगान के नेतृत्व वाली, अफगान-स्वामित्व वाली और अफगान-नियंत्रित शांति प्रक्रिया के अपने समर्थन को दोहराना चाहूंगा। अफगानिस्तान में किसी भी राजनीतिक समझौते को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पिछले दो दशकों के लाभ सुरक्षित रहें न कि बदल जाएं। उन्होंने कहा कि “भारत, अफगानिस्तान की सरकार और इसके लोगों के लिए एक शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और समृद्ध भविष्य, आतंक मुक्त माहौल के लिए उनकी आकांक्षाओं को साकार करने के लिए हर संभव सहायता प्रदान करना जारी रखेगा, ताकि अफगान समाज के सभी वर्गों के अधिकारों और हितों की रक्षा को बढ़ावा दिया जा सके।

बता दें कि तालिबान और अफगानिस्तान 19 सालों के गृह युद्ध को समाप्त करने के लिए बातचीत कर रहे हैं, जिसमें हजारों की संख्या में लोग मारे गए। भारत, अफगानिस्तान की शांति और स्थिरता में महत्वपूर्ण साझेदार है।