
(प्रख्यात भाषाविद्-समीक्षक)
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
२९ जुलाई, २०१८ ई० को एल०टी० की हिन्दी-विषय की परीक्षा के प्रश्नपत्र में पाँच प्रश्न और उनके उत्तर पूरी तरह से ग़लत हैं।
हिन्दीभाषा, व्याकरण, भाषाविज्ञान, साहित्य तथा समीक्षा के एक जागरूक अध्येता होने के कारण सम्बन्धित आयोग के उच्चपदस्थ अधिकारियों के समक्ष मैं उन तथ्यों को सप्रमाण प्रस्तुत करना चाहता हूँ, जिनके प्रकाश में आ जाने से आयोग का घिनौना चेहरा सामने आ जाता है। आयोग की ओर से पाँच प्रश्नों को मैं चुनौती दे रहा हूँ; क्योंकि इस तरह के प्रश्न और उनके उत्तर का निर्धारण करना सम्बन्धित ‘प्राश्निक’ (प्रश्नपत्र तैयार करनेवाला) की अपरिपक्वता का परिचायक है।
प्रश्न ८५– “हमको लिख्यो….” इसके चारों उत्तर ग़लत हैं और प्रश्न करते समय चारों विकल्प ग़लत नहीं दिये जाते। सही उत्तर ‘भावोदय’ होगा, जिसका विकल्प में स्थान नहीं दिया गया है। इस प्रश्न को बनानेवाले को ‘काव्यशास्त्र’ की कितनी समझ है, सुस्पष्ट हो जाता है।
प्रश्न ७९- भामह के अनुसार, काव्य में कितने दोष होते हैं?
आयोग ने इस प्रश्न के उत्तर में जितने विकल्प दिये हैं, सभी ग़लत हैं। ‘भामह’ के अनुसार, तीन दोष होते हैं।
प्रश्न १०२– निम्नलिखित में से ‘अभ्र’ का पर्यायवाची है :–
पहली बात यह प्रश्न ही ग़लत है; क्योंकि इसमें ‘अभ्र’ के अर्थवाले दो शब्द दिये गये हैं :– (b) बादल (c) आकाश। ऐसे में, इस प्रश्न का कौन-सा उत्तर शुद्ध है, इसका निर्णय ‘व्याकरण की किस कसौटी’ पर किया जायेगा? आयोग उत्तर दे।
प्रश्न १४७– निम्नलिखित में से कौन रामानन्द का शिष्य नहीं था?
अब उत्तर के लिए विकल्प देखिए :– (a) अनंतानंद (b) सुखानंद (c) नरहर्यानंद (d) रैदास।
सत्य यह है कि उक्त चारों ही रामानन्द के शिष्य थे। हिन्दी-साहित्य के इतिहास के अन्तर्गत ‘भक्तमाल’ में रामानन्द के बारह भक्त बताये गये हैं, जिनमें से उक्त चारों भी उनके भक्त थे। ऐसे में, इस प्रश्न और इसके उत्तर की विश्वसनीयता पूरी तरह से समाप्त हो जाती है।
एक अन्य प्रश्न और उसके को देखें :–
‘दुर्व्यवहार’ में प्रयुक्त उपसर्ग बताइए :–
(a) दु: (b) वि (c) अव (d) उपर्युक्त सभी
पहली बात, यह प्रश्न ही ग़लत है; क्योंकि ‘दुर्व्यवहार’ शब्द में इनमें से कोई प्रत्यय प्रयुक्त नहीं है।
इसका शुद्ध और उपयुक्त उत्तर है– ‘दुर्’ है, जिसे विकल्प में दिया ही नहीं गया है।
आयोग अब ‘अयोग्य’ हो चुका है। इसके सभी अकर्मण्य अधिकारियों, विशेषकर उन्हें, जो प्राश्निकों और परीक्षकों की नियुक्ति करते हैं, तत्काल प्रभाव से निकाल बाहर किया जाये। इस विषय के प्रश्नपत्र बनानेवाले को सदैव के लिए ‘काली सूची’ में डालकर ‘आपराधिक मुक़द्दमा’ चलाया जाये।
हमारे देश के विद्यार्थियों के साथ कितना गन्दा खेल खेला जा रहा है, उत्तरप्रदेश के मुख्यमन्त्री आदित्यनाथ योगी तक इन तथ्यों को पहुँचाया जाये।
(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, इलाहाबाद; २३ अक्तूबर, २०१८ ईसवी)