हरदोई विशेष-
विश्व में पक्षियों की लगभग 10000 दस हजार प्रजातियां उनमें से लगभग 1300 प्रजातियां भारत में उसमें से भी इस स्थान पर ही 550 देखी जा सकती हैं । प्रकृति और खूबसूरत दुलर्भ पक्षियों के बीच वक्त गुजारना सबसे अच्छा तनाव मुक्ति का तरीका है तो इस बार कुछ दिन का समय निकाल कर घूम आयें साण्डी पक्षी अभयारण्य।इसके लिए डीएम पुलकित खरे की अनोखी पहल हो रही है।इस बार 3 फरवरी से 5 फरवरी तक सांडी पंक्षी महोत्सव मनाया जा रहा है जिसमे विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिता,सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ प्रकृति को नजदीक से जानने के लिए विशेष आयोजन किये जायेंगे।यह जानकारी डीएम पुलकित खरे ने प्रेस वार्ता के दौरान दिए है।
बतादें की साण्डी पक्षी अभयारण्य उत्तर हरदोई साण्डी मार्ग पर स्थित है। इस अभयारण्य की स्थापना 1990 ई में हुई थी यह अभयारण्य लखनऊ से मात्र 150 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है और लगभग तीन किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां पक्षियों की अनेक दुर्लभ प्रजातियां देखी जा सकती है। हालांकि नवंबर माह में यहां पक्षियों का आना शुरू हो जाता है फिर भी साण्डी पक्षी अभयारण्य घूमने के लिए सबसे उचित समय दिसम्बर से फरवरी है। विश्व में पक्षियों की लगभग 10000 दस हजार प्रजातियां हैं। उनमें से लगभग 1300 प्रजातियां भारत में पायी जाती हैं और उसमें से भी इस स्थान पर ही 550 देखी जा सकती हैं। इनमें से कुछ खास प्रजातियां केवल सर्दियों के मौसम में ही यहां आती हैं।सर्दियों में दिखने वाले पक्षी दरसल प्रवासी पक्षी होते हैं जो विदेशों से मीलों की यात्रा करके यहां आते हैं। जैसे पर्पल सनबर्ड जो हरदोई जिले के पश्चिम में स्थित इस पक्षी विहार की सबसे बड़ी खासियत हैं। ये दुलर्भ पक्षी दिसम्बर के दूसरे सप्ताह के आसपास यहां पहुंचता है। इस पक्षी बिहार के पास ही गर्रा नदी बहती है जिसका प्राचीन नाम गरुण गंगा बताया जाता है। नदी के पास ही है दहर झील, यहां आने वाले प्रवासी पक्षियों को अक्सर कुछ समय के लिए इसमे भी विश्राम करते देखा जा सकता है।
प्रवासी पक्षियों को लेकर टॉप रैंकिंग में शुमार हरदोई की दहर झील जिसे सांडी पक्षी विहार के नाम से भी जाना जाता है।देश-विदेश से आने वाले पक्षी जिनपर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विदेशी सरकारों की नज़र रहती है, वर्ल्ड वाइल्ड इस को लेकर हमेशा ही सक्रिय बना रहता है।अखिलेश सरकार ने इस झील के लिए करोड़ों रुपया दिया था, लेकिन उन रुपयों का बंदरबांट ऐसा हुआ कि जिस झील में जुलाई तक पानी पहुंचना था, वहां आज तक पानी नहीं पहुंच सका है। करीब 300 हेक्टेयर में बसे इस पक्षी विहार की खास बात यह थी कि दूर दूर देशों से आने वाले प्रवासी पक्षी ज्यादातर सांडी पक्षी विहार को ही अपना ठिकाना बनाते थे, लेकिन अब पानी की कमी यहां बड़ी समस्या बनी हुई है। पूरी झील एक तालाब के मानिंद दिख रही है।