सिद्धपीठ शिलहट धाम, सीतापुर में हुआ “जिनसे है रोशन दीवाली” कार्यक्रम का आयोजन

दीवाली की परम्परा के केंद्र बिंदु कुम्भकार समाज को किया गया सम्मानित ।

आधुनिक तकनीक के चलते उपेक्षित समाज को सरकारी सहयोग की माँग की गयी।

दीवाली के दिन जब सब अपने परिवारों के साथ दीवाली की तैयारियों में व्यस्त थे तब ब्रह्मावली, सीतापुर के नौजवानों ने दिल्ली विश्वविद्यालय में शोधछात्र एवं कांग्रेस के युवानेता सुधान्शु बाजपेयी की पहल पर मिलकर कुम्हारों की दीवाली रौशन करने की ठानी क्योंकि यही हैं जिनकी वजह से सदियों से हमारी दीवाली रौशन है और आयोजन का नाम दिया “जिनसे है रौशन दीवाली” ।

फिर जो कुम्हार दिये लेकर हमारे घर आते थे,नौजवान उनके घर पहुँचे। तमाम बुजुर्ग आमंत्रण सुनकर अभिभूत से हो गये। सहर्ष आयोजन में शामिल होने की सहमति दे दी। माता शिलहट पीठ पर इस अनूठे आयोजन के साक्षी और सहभागी बनने तमाम लोग जुट गये।  उसके बाद कुंभकार समाज को शाल और मिठाई देकर सम्मानित किया गया। उनके साथ मिलकर दिये जलाये, मिठाइयाँ खिलायी और नौजवानों को दीवाली में अधिक से अधिक मिट्टी के दिये उपयोग करने का संकल्प दिलाया। 

मिट्टी के दिये उपयोग करने का संकल्प लेते ग्रामीण

इस आयोजन में एक कड़ी और जुड़ी ‘दिये शहीदों के नाम’, आजादी से अबतक वतन के लिए तमाम शहीदों को समर्पित दीपक जलाए गए। ‘जिनकी वजह से दीवाली और ईद है, वतन के लिए हुए जो शहीद हैं, यह दिये आज उनके नाम हैं।’ भारत माता के नक्शे की आकृति बनाकर उन शहीदों के नाम दीप प्रज्वलन किया गया।

इस कार्यक्रम की अवधारणा बताते हुए युवा नेता सुधान्शु बाजपेयी ने कहा कि बचपन से लेकर अब तक जब भी कुम्हार चच्चा दियों की झौआ दुआरे पर रखते। रोम रोम खुशियों भर जाता। आँखों के सामने मिट्टी बनाते,  चाक चलाते, ठठेरा लगाते चच्चा की तस्वींरें घूम जातीं। एहसास होता सदियों से यही तो हैं जिनके श्रम से हमारी दीवाली आबाद है। जिनकी वजह से यह विरासत चल रही है,जो कुदरत से दोस्ती के साथ आगे बढ़ती है, न कि कुदरत को नुकसान पहुँचाती है। इसलिए हमलोंगों ने यह दीवाली उनके साथ मनाने का निश्चय किया।

इस मौके पर भरत शुक्ला और नितेन्द्र यादव ने कहा कि साथ ही यह दिये गाँधी, भगत सिंह, आजाद सहित उन अनगिनत शहीदों के नाम हैं जिनकी वजह से हमारा वतन और उसके त्यौहार आबाद हैं। कुम्हार परिवारों एवं जनता की तरफ से आये प्रस्ताव को आगे बढ़ाते हुए कहा कि वर्तमान सरकार एक तरफ भारतीय संस्कृति की दुहाई देती है मगर दूसरी तरफ कुम्हार परिवारों सहित सभी परंपरागत पेशेवर उपेक्षित हैं। हम जनता की तरफ से अपील करते हैं कि सरकार इन्हें पेंशन या सरकारी सहयोग के द्वारा प्रोत्साहित करे।

इस अवसर पर युवा कांग्रेस नेता अंकुर त्रिवेदी, अविरल तिवारी के साथ ही आचार्य विवेक मिश्र, मोहित मिश्रा ‘लल्लू मास्टर’, प्रवक्ता शिव सेवक मिश्रा, राहुल मिश्रा, प्रशांत मिश्रा, राम मिश्रा सहित तमाम क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।