कोथावाँ प्रा०वि० का हाल, बच्चों को दूध और फल नहीं दे रहे जिम्मेदार

आओ ! वेदान्त दर्शन के महाप्राण ‘स्वामी विवेकानन्द जयन्ती’ पर उनकी शिक्षाओं से कुछ ग्रहण करें

आधुनिक हिन्दू चेतना के युगसृष्टा, महात्मा, वेदान्त दर्शन के महाप्राण, धर्म विज्ञानी, भारतीय ज्ञान की प्रतिमूर्ति, अजस्र प्रेरणा स्रोत स्वामी विवेकानन्द की जन्मतिथि (राष्ट्रीय युवा दिवस) पर देवतुल्य श्री चरणों में कोटिशः प्रणाम ।

स्वामी जी कहते हैं कि “एक अच्छे चरित्र का निर्माण हजारो बार ठोकर खाने के बाद ही होता है”

वह कहते हैं कि “हर आत्मा ईश्वर से जुड़ी है, करना ये है कि हम इसकी दिव्यता को पहचाने अपने आप को अंदर या बाहर से सुधारकर। कर्म, पूजा, अंतर मन या जीवन दर्शन इनमें से किसी एक या सब से ऐसा किया जा सकता है और फिर अपने आपको खोल दें। यही सभी धर्मो का सारांश है। मंदिर, परंपराएं , किताबें या पढ़ाई ये सब इससे कम महत्वपूर्ण है”

इस आशा के साथ कि युवा पीढ़ी और दिग्भ्रमित वर्ग स्वामी जी की शिक्षाओं के आगार से कुछ धर्मज्ञान प्राप्त कर देश की क्षीण होती गुरुत्व की गरिमा को पुनः लौटाने में योगदान दे । “ॐ तत् सत” ।।

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’