सई नदी में एक दर्जन से अधिक गोवंशो के देखे गये शव, दुर्गंध से संक्रामक बीमारी फैलने की संभावना

पी०डी० गुप्ता —

कछौना, हरदोई। एक तरफ योगी सरकार गौवंशो सुरक्षा-संरक्षण के नाम जनता के विकास का करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाए जा रहे हैं, परन्तु जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। 

जमीनी स्तर पर गौवंशो पर अत्याचार रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। कहीं गौवंशो को कौवे कुत्ते नोचते हुए पाए जाते हैं, तो कहीं नदी में व तालाबों में तैरते हुए शव पाए जाते हैं। ऐसा ही एक मामला सई नदी में देखने को मिला, जहां एक दर्जन से अधिक शव तैरते देखे गए, गौवंशो में सड़न की दुर्गंध के कारण राहगीरों व किसानों का निकलना मुश्किल हो रहा है। कुरसठ से कछौना जाने के लिए परौली होकर जाना पड़ता है। परौली और बाड़ के बीच में सई नदी का पुल स्थित है। पुल के नीचे एक दर्जन से अधिक गौवंशो के शव तैरते हुए देखे गए हैं। प्रश्न यह उठता है की आखिरकार इतनी ज्यादा संख्या में गौवंश आए तो आए कहां से है सरकार को गौवंशो की सुरक्षा को लेकर कड़े कानून बनाने की आवश्यकता है। अन्यथा गोवंशो के ऊपर इसी तरह से अत्याचार होता रहेगा।