मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे ग्रामीण, विधानसभा-चुनाव का कर सकते हैं बहिष्कार

कछौना (हरदोई): विधानसभा क्षेत्र बालामऊ 160 के अंतर्गत ग्राम पंचायत कलौली के मजरा बबुरहा के ग्रामीणों ने जिला अधिकारी को पत्र लिखकर क्षेत्र की समस्याओं के बारे में अवगत कराया है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि हम एक संगठन बनाकर स्वयं को मजबूत नहीं करेंगे तब तक मुख्य समस्या ग्राम बबुरहा से ग्राम कन्हौआ तक गड्ढा युक्त कच्चा जर्जर मार्ग की दूरी लगभग एक किलोमीटर ज्वलंत समस्या का आजादी से कई दशक बीत जाने के बाद भी इसका निराकरण नहीं किया गया है। इस मार्ग पर एक प्राथमिक विद्यालय बबुरहा भी स्थित है। हर लोकसभा, विधानसभा व पंचायत चुनावों पर ही जनप्रतिनिधियों को वोट लेने के लिए समस्याएं नजर आती हैं। हर बार लोकतंत्र के महापर्व पर सहूलियत के दावे कर हर बार वोट तो लिए गए लेकिन वादों संग ग्रामीणों के साथ बेवफाई की गई। गांव का मुख्य मार्ग आज भी कच्चा होने के कारण लड़कियों की शादी करने में भी दिक्कत होती है। संपर्क मार्ग न होने के कारण ग्रामीणों को आवागमन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस मार्ग पर पैदल चलना भी दुष्क है। बरसात के समय मार्ग पर पानी भरने पर मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो जाता है। सबसे ज्यादा दिक्कत गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान होती है, क्योंकि गांव में कोई वाहन व एंबुलेंस सेवा नहीं पहुंच सकती। जिसके चलते कई बार अनहोनी घटना घट चुकी है। जबकि इस मार्ग पर विद्यालय में पोलिंग बूथ भी है।

सत्येंद्र कुमार कन्हौआ निवासी की 14 वर्षीय पुत्री की मृत्यु सर्पदंश से इलाज के अभाव में मृत्यु हो चुकी है, क्योंकि गांव को एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी थी। वहीं दो वर्ष पूर्व नौनिहाल कमल पुत्र शिव कुमार की ट्रेन की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो चुकी है। छिटपुट लड़ाई झगड़ों में 100 नंबर वाहन गांव में न पहुंच पाने से लड़ाई-झगड़ा की घटनाओं में इजाफा हो गया है। छोटी-छोटी घटनाएं मार्ग न होने से बड़ा रूप धारण कर लेती हैं। चुनाव के समय नेता पैर छूकर वोट तो ले लेतें हैं, लेकिन बाद में लौट कर कोई नहीं आता है। इस बार वे विकास को तरजीत देने वाले नेता को समस्या बताएंगे। चुनाव में जीत के बाद उससे वायदा पूरा करने का दबाव बनाया जाएगा। ग्रामीणों ने आगे बताया कि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने गांव के साथ बेरुखी की है। नेताओं को छोड़ो, अधिकारियों को तो गांव का दौरा करना चाहिए, लेकिन कोई नहीं सुनता है। कितनी पंचवर्षीय योजनाएं बदलीं लेकिन नहीं बदली तो सिर्फ बबुरहा गांव के विकास की तस्वीर। यह गांव विकास के धरातल से कोसों दूर है। इस बार ग्रामीण विधानसभा चुनाव को बहिष्कार कर करने का पूरा मन बना चुके हैं।

रिपोर्ट- पी०डी० गुप्ता