नवरात्रि का अध्यात्मिक महत्व

नौ तिथि नौ नक्षत्र नौ शक्तियों की नवधा भक्ति के साथ सनातन से मनाया जा रहा है नौ-दुर्गा व्रत त्यौहार

राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित’ कवि, साहित्यकार,

समीक्षक, नवरात्रि का पर्व हर वर्ष नौ दिन तक मनाया जाता है। इन नो रातों में शक्ति या देवी की विशेष पूजा की जाती है। दसवें दिन विजयादशमी मनाई जाती है। नवरात्रि वर्ष में चार बार आती है। पौष, चैत्र, आषाढ़ व आश्विन माहों में। प्रतिपदा से नवमी तक ये त्योहार मनाया जाता है। गरबा के मंच आकर्षक रूप से सजाएं जाते हैं। गुजरात के गरबा नृत्य सारे देश मे प्रसिद्ध है। नवयुवक नवयुवतियां नंगे पांव भूखे प्यासे रहकर देवी की आराधना करते है। संध्या समय गरबा खेलते हैं।

नौ दिन तक महालक्ष्मी, महासरस्वती या दुर्गा के नो रूपो की पूजा की जाती है। जिन्हें नव-दुर्गा कहते हैं। दुर्गा वह है जो जीवन से दुख को हटा देती है। पूरे भारत मे ये नौ दिन वाला पर्व हर्षोल्लास से मनाया जाता है। चैत्र माह व अश्विन माह में विशेष नवरात्रि मनाते हैं।

आइये जानते हैं ये नौ देवियां कौन-कौन हैं

शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघण्टा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री ।

शैलपुत्री का अर्थ है पहाड़ों की पुत्री। ब्रह्मचारिणी का अर्थ है ब्रम्हचारिणी। चन्द्रघण्टा इसका अर्थ है चांद की तरह चमकने वाली। कुष्मांडा सारा जगत जिनके पैर में है। स्कंदमाता यानी कार्तिक स्वामी की माता। कात्यायन आश्रम में जन्मी यानी कात्यायनी। सफेद रंग वाली मां महागौरी। सर्व सिद्धि देने वाली मां सिद्धिदात्री।

शक्ति की उपासना का पर्व शारदीय नवरात्रि प्रतिपदा से नवमी तिथि तक निश्चित नौ तिथि नौ नक्षत्र नौ शक्तियों की नवधा भक्ति के साथ सनातन से मनाया जा रहा है। सर्वप्रथम समुद्र तट पर भगवान श्रीराम ने इस शारदीय नवरात्र का प्रारम्भ किया था। फिर दसवें दिन रावण को मार के आने के बाद से विजतदशमी पर्व मनाया जाने लगा।

आदिशक्ति के हर दिव्य रूप की झांकी के नौ दिन तक दर्शन करने से दिव्य चेतना का संचार होता है। शक्ति का संचार होने लगता है। सिद्धियों की प्राप्ति होती है। मन शांत हो जाता है। नवरात्रि के दिन कमल पुष्प पर आसीन माता सिद्धिदात्री की पूजा होती है। इनका वाहन सिंह है नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है। प्रतिदिन दुर्गासप्तमी का पाठ किया जाता है।
नवदुर्गा व दस महाविद्याओं में काली ही प्रथम प्रमुख है। जो अनंत महासिद्धियाँ प्रदान करती है। प्राकृतिक सम्पत्तियों को प्रदान करने वाली देवी लक्ष्मी है। देवता मानव दानव सभी को इनकी कृपा की जरूरत है। देवता गंधर्व राक्षस इनकी कृपा प्रसाद के लिए कठिन तप करते है। हाथों में खप्पर लेकर अग्नि के जलते अंगारों पर नंगे पांव निकलते हैं। जिसके दर्शन करने हेतु लाखों दर्शनार्थी माता के मंदिरों पर जाते हैं। बंगाल मैसूर गुजरात सब जगह की नवरात्र मशहूर है।

नवरात्र उत्सव देवी अम्बा विद्युत का प्रतिनिधित्व करती है। बसंत की शुरुआत और शरद ऋतु की शुरुआत जलवायु व सूरज के प्रभावों का महत्वपूर्ण संगम काल माना जाता है। इन दो समय मे देवी दुर्गा की विशेष पूजा के श्रेष्ठ अवसर माने गए हैं। चन्द्र कैलेंडर से तिथियां इस त्योहार की निर्धारित कर ली जाती है।

नवरात्रि पर्व माँ दुर्गा की अवधारणा भक्ति और परमात्मा की शक्ति उदात्त परम परम् रचनात्मक ऊर्जा की पूजा की सबसे शुभ अवधि ये नौ दिन ही माने गए हैं। ये पूजा वैदिक काल से पहले प्रागैतिहासिक काल से चली आ रही है। नवरात्रि के पहले तीन दिन दुर्गा पूजा के लिए होते हैं। ऊर्जा व शक्ति की पूजा की जाती है। प्रत्येक दिन दुर्गा के अलग अलग रूप की विशेष पूजन श्रृंगार के साथ उपासना की जाती है। नवरात्रि के चौथे से छठे दिन जब व्यक्ति अहंकार क्रोध वासना पर काबू पा लेता है तब वह शून्य का अनुभव करता है। यह शून्य आध्यात्मिक धन से भर जाता है। प्रयोजन के लिए धन और समृद्धि प्राप्त करने के लिए लक्ष्मी की पूजा करता है। इस प्रकार व्यक्ति बुरी प्रवृतियों व धन पर विजय प्राप्त कर लेता है। पर वह सच्चे ज्ञान से वंचित है। ज्ञान के बिना मानवीय जीवन पशु समान है। इसलिए सातवें दिन माता सरस्वती की पूजा की जाती है। साहित्य पुस्तकों को एक जगह एकत्रित करते हैं। दीप प्रज्वलन करते हैं। आठवें दिन दुर्गा की पूजा कर दुर्गाष्टमी मनाते है। नौवें दिन माता सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है जो सिद्ध बना देती है। इस प्रकार नव रात्रि पर्व मनाया जाता है।

सभी जीव जंतुओं में चेतना के रूप में माँ तुम स्थित हो। परा प्रकृति में रहकर ध्यान में मग्न होने के नो दिन है नवरात्रि। यहां से बाहर निकलते ही जीवन मे प्रस्फुरण होने लगता है। जीवन मे सृजनात्मकता आ जाती है। शरीर की शुद्धि हो जाती है मन शुद्ध हो जाता है यानि बैटरी चार्ज हो जाती है।सत्व शुद्धि हो जाती है। बुद्धि शुद्ध हो जाती है। तब कल्याण ही कल्याण होता है यही है नवरात्रि का सीधा अर्थ।