औषधीय पौधों से संबंधित कृषि-प्रौद्योगिकियों के अनुसंधान और विकास को मिलेगा बढ़ावा

आयुष मंत्रालय, सीएसआईआर और आईसीएआर के बीच एमओयू साइन

नई दिल्ली, 8 मार्च 2022: आयुष मंत्रालय ने वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के साथ मिलकर मंगलवार को आईएनए कॉलोनी के जीपीओ कॉम्प्लेक्स स्थित आयुष भवन में एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। समझौते के तहत औषधीय पौधों से बने उत्पाद कृषि-प्रौद्योगिकियों के अनुसंधान, विकास, सत्यापन और परिनियोजन पर जोर दिया जाएगा। साथ ही इसे इंसानों, पौधों और जानवरों के इस्तेमाल में कैसे लाया जाए इस पर भी अध्ययन होगा। समझौता ज्ञापन पर आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा, आईसीएआर के महानिदेशक और डेयर के सचिव डॉ. त्रिलोचन महापात्र और सीएसआईआर के महानिदेशक और डीएसआईआर के सचिव डॉ. शेखर सी. मांडे ने हस्ताक्षर किए। त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन का मुख्य उद्देश्य भारत की पारंपरिक कृषि पद्धतियों का संज्ञान लेना है। वहीं देश में सामाजिक-आर्थिक विकास को सुविधाजनक बनाने के लिए इस समझौते को मान्य और लागू करने के लिए संयुक्त अनुसंधान एवं विकास कार्य करना है।

देशवासियों के जीवन पर पड़ेगा महत्त्वपूर्ण प्रभाव–
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने वृक्षायुर्वेद, मृगयुर्वेद की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि समझौता न केवल मनुष्यों के लाभ के लिए कृषि की दिशा में इन पारंपरिक विज्ञान और रीति रिवाज को मान्य करने में सहायक होगा बल्कि पौधे और जानवरों को भी इसका लाभ मिलेगा। इस अवसर पर बोलते हुए आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्र ने कहा कि आईसीएआर, आयुष और सीएसआईआर द्वारा किया जा रहा समझौता खाद्य और कृषि पर देश के लक्ष्यों और लोगों को नई दिशा देने में ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा। यह प्रयास उक्त क्षेत्रों में देशवासियों के जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालने के लिए सामूहिक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करेगा।

आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को पूरा करेगा समझौता
सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ. शेखर सी. मांडे ने विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के दौरान पारंपरिक दवाओं को बढ़ावा देने की दिशा में बागवानी-फूलों की खेती और आयुष मंत्रालय सहित कृषि के क्षेत्र में आईसीएआर के साथ सीएसआईआर के सहयोग की सराहना की। उन्होंने आधुनिक एस एंड टी उपकरणों के माध्यम से भारतीय पारंपरिक ज्ञान की विशालता को जोड़ने और विशेष रूप से खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ किसानों की आजीविका बढ़ाने के लिए आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य पूरा करने में त्रिपक्षीय समझौते को महत्व दिया। समझौते में वैज्ञानिक जानकारी, अनुसंधान प्रोटोकॉल, सेमिनार, कार्यशालाएं, विचार-विर्मश कार्यक्रम और फील्ड क्लिनिकल परीक्षण को भी शामिल किया गया है। ऐसे में इसको लेकर साल में कम से कम दो बार बैठक होगी, जिसमें हर पहलू पर गहनता से मंथन होगा।