● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
कुत्ता जब पागल हो जाता है तब वह बिना विचार किये सबको काटता रहता है। वैसी स्थिति उत्पन्न होते ही लोग मिलकर उसे मार डालते हैं; क्योंकि अन्तत:, वह एक ‘पागल कुत्ता’ होता है। वह जिस किसी को भी देखता है, गुर्राना शुरू कर देता है और दौड़ाकर काटना भी।
आज ठीक वही स्थिति रूसी परिसंघ के राष्ट्रपति पुतिन की है। उसके पागलपन के कारण आज विश्व अस्थिर दिख रहा है; वैश्विक आर्थिक तन्त्र असन्तुलित हो चुका है। आज इस बात की आवश्यकता है कि सभी देश के सैनिक अचानक एक साथ मिलकर उसके और उसके सैनिकों पर जल-थल-नभ से आक्रमण कर उन्हें धराशायी करें, अन्यथा मदान्ध पुतिन विश्व को विनाश की ओर ले जाने के लिए अपना पापी क़दम बढ़ा चुका है। उसकी मानसिकता विकृत हो चुकी है; वह कुण्ठित हो चुका है और किंकर्त्तव्यविमूढ़ भी। वह किसी भी देश की सम्प्रभुता को बरदाश्त करने की स्थिति मे नहीं दिख रहा है। अधिनायकवाद के पोषक, निरंकुश-तानाशाह पुतिन को यदि किसी भी प्रकार से शान्त कर दिया जाता है तो विश्व जिस उधेड़बुन मे फँसा दिख रहा है, उससे मुक्ति मिल जायेगी।
दृष्टि मे वस्तुपरकता लाने पर ज्ञात होता है कि वह संयुक्त राज्य अमेरिका की चाल मे फँस चुका है। संयुक्त राज्य अमेरिका का राष्ट्रपति जो बाइडेन एक अनुभवी राजनयिक है और वह अपनी कूटनीतिक भूमिका मे आकर पुतिन की शक्ति का क्षरण कराता आ रहा है; और यह भी कि वह पुतिन का आतंकी और नृशंस चेहरा विश्व के सम्मुख लाना चाहता है; वह विश्व को यह भी दिखाना चाहता है कि वास्तविक ‘विश्वशक्ति’ संयुक्त राज्य अमेरिका है, न कि रूसी परिसंघ। यही कारण है कि जिस एक छोटे-से देश युक्रेन के साथ रूसी सेना को लड़ते हुए आज ६४ दिन हो चुके हैं, उस पर पुतिन की सेना पूरी तरह से विजय प्राप्त नहीं कर सकी है तो वह किस अर्थ मे ‘विश्वशक्ति’ है? बाइडेन अपनी इस रणनीति मे पूरी तरह से सफल दिख रहा है।
पुतिन के लिए युक्रेन ‘साँप-छछून्दर’ की स्थिति प्राप्त कर चुका है। यही कारण है कि पुतिन के दिमाग़ ने काम करना बन्द कर दिया है और वह प्रतिशोध की आग मे जल-जलकर अपने चेहरे को विकृत कर चुका है। अब उसका चेहरा ‘बेहद घिनौना’ दिख रहा है; क्योंकि उसने हज़ारों युक्रेनी आबाल वृद्ध नर-नारी के नरसंहार कराये हैं। इतिहास निर्मम-नृशंस पुतिन को कभी क्षमा नहीं करेगा।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ३० अप्रैल, २०२२ ईसवी।)