ब्लॉक कोथावां में वोटर लिस्टों की बिक्री के नाम पर हो रही अवैध वसूली

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय का संदेश

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

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आत्मीय मित्रमण्डल!
वर्तमान समय संकट-संत्रास-संघर्षण का है। आप सपरिवार, इष्ट-मित्रवृन्द के साथ महामारी-संक्रमण के समय में अपनी इच्छाशक्ति को सुदृढ़ करें। आप यदि ऊर्जावान् रहते हुए, अभावग्रस्त व्यक्ति की किसी भी रूप में सहायता करने में समर्थ हों तो निश्चित रूप से करें। आपकी ‘सदाशयता’ मनुष्यता को चरम पर समासीन करेगी।

कालचक्र कभी सम नहीं रहता। यही कारण है कि सभी के जीवन में कभी आँखों में बदली घिरती रहती है तो कभी प्रकृति में। यही दु:ख-सुख का गमनागमन है। कोई स्वयं को यह समझे कि वह अद्वितीय पराक्रम से परिपूर्ण है तो यह उसकी भूल है या फिर अहम्मन्यता के आवरण के कारण उसकी दृष्टि समर्थ नहीं बन/हो पाती। यथार्थ के धरातल पर हमारा-आपका कोई मूल्य नहीं। ऐसा इसलिए कि जो कुछ भी दिखता है, वह ‘सत्य’ नहीं होता, अन्यथा ‘मिथ्या’ का अस्तित्व कब का मिट चुका होता।

मैथिलीशरण गुप्त स्मरण हो आते हैं, “मरा नहीं वही कि जो जिया न आपके लिए।”

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