“पं० केशरीनाथ त्रिपाठी एक कुशल विधिवेत्ता के साथ ही एक प्रभावकारी साहित्यकार भी हैं। उनकी काव्यकला मे जिस प्रकार का बिम्ब-विधान और प्रतीक-योजना लक्षित होती है, वह उनकी सम्यक् काव्यदृष्टि की परिचायक है। उनकी समयसत्य रचनाधर्मिता देखते ही बनती है।”
उक्त उद्गार समारोह के मुख्य अतिथि लब्धप्रतिष्ठ भाषाविज्ञानी, समीक्षक एवं मीडियाध्ययन-विशेषज्ञ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (प्रयागराज) ने सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका (झारखण्ड) के हिन्दी-विभाग की ओर से १० नवम्बर को बिहार, बंगाल, मेघालय, मिज़ोरम तथा त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल पं० केशरीनाथ त्रिपाठी की नवासीवीं जन्मतिथि के अवसर ‘पं० केशरीनाथ त्रिपाठी की ‘साहित्यिक सत्ता और महत्ता’ विषय पर आयोजित आन्तर्जालिक राष्ट्रीय संगोष्ठी मे व्यक्त किया था। लातूर, महाराष्ट्र के राजर्षि साहू महाविद्यालय मे हिन्दी-विभागाध्यक्ष डॉ० पल्लवी भूदेव पाटिल ने विशिष्ट अतिथि के रूप मे विचार व्यक्त करते हुए कहा, “पं० केशरीनाथ त्रिपाठी का साहित्यसर्जन बहुआयामिक रहा है। उन्होंने भावनास्तर पर जिस प्रकार की कविता-रचना की है, उससे उनकी भावयित्री प्रतिभा उभरकर आती है।”
इसी अवसर पर हिन्दी-विभाग के वरिष्ठ शिक्षक डॉ० अमीर हसन ने कहा, “पं० केशरीनाथ त्रिपाठी ने जिस तन्मयता के साथ साहित्य की सेवा की है, वह अनुकरणीय है।” सहायक प्राध्यापक डॉ० राजेश प्रसाद ने कहा, “त्रिपाठी जी ने राजनीतिक और विधिक दायित्वों का निर्वहण करते हुए जिस प्रकार से अपना संतुलन बनाकर साहित्यिक अवदान किया है, वह प्रेरणादायक है।” समारोह के संयोजक और राष्ट्रीय सेवा योजना के समन्वयक और हिन्दी-विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ० अजय शुक्ल ने कहा, “पं० केशरीनाथ त्रिपाठी की सारस्वत यात्रा विश्व-साहित्य के लिए एक महत्त्वपूर्ण देन है। उनका जितना अधिकारपूर्ण लेखन पद्य मे रहा है उतना ही गद्य मे भी रहा है। यही कारण है कि उनका साहित्य अत्यन्त समृद्ध दिख रहा है।” अपने अध्यक्षीय सम्बोधन मे हिन्दीविभागाध्यक्ष सह मानविकी संकायाध्यक्ष डॉ० विनयकुमार सिन्हा ने कहा, “पं० केशरीनाथ त्रिपाठी की रचना मे समाज का भाव और विचार प्रतिबिम्बित होता दिखता है। उनकी रचना मे जड़-चेतन का सम्यक् संतुलन दिखता है।”
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के हिन्दी-विभाग की छात्र-छात्राएँ उपस्थित थीं। समारोह का कुशल संचालन डॉ० अजय शुक्ल ने किया।