सीतांशु त्रिपाठी सतना म॰ प्र॰–

सुनो राम मैंने कहा न था तुम मुझको मार न पाओगे,
मै तो हूँ अमर और निडर भी तुम कैसे मुझे डराओगे ,
तुमने देखे थे मेरे दस शीष आओ कुछ और दिखाता हूँ ,
मेरे नाम है और भी कितने आओ कुछ से परिचय करवाता हूँ,
मैं हूँ साधु-संत तुम्हारा मैं ही हूँ धर्म और ग्रन्थ तुम्हारा ,
हो सकता हैं मै ही हूँ भाई और बाप तुम्हारा ,
देखो अपने आस-पास तुम मुझको ढूंढ न पाओगे,
तुम ने गलती की मुझको जानने और पहचानने में
पर अब तुम मुझको पहचान न पाओगे ,
सीता हरण की अब जरुरत नही मुझे
खुद ही चल बाबा के चरणों में आओगे ,
मै ही हूँ जीवन दाता मै ही हूँ भाग्य विधाता मैं हूँ
अन्तर्यामी मैं हूँ कलयुग का स्वामी
ये सबको तुम खुद ही बतलाओगे ,
अरे सुनो राम मैंने कहा न था तुम मुझे मार न पाओगे ।
वो मेरा कल था जब मैंने सीता को छुआ नहीं
पर ये मेरा आज है,
और आज 18-20 की बात नहीं
3-4 साल की बच्ची को भी तुम बचा न पाओगे ,
बच्ची को घर से बाहर भी मत भेजो
क्योंकि मैं तो हूँ हर घर में ही बैठा,
पर तुम अब मुझको पहचान न पाओगे,
तुमको बतला दूं कि ये दुनिया और तुम्हारी सरकार भी
मेरा कुछ बिगाड़ नहीं सकती,
बना लो जितने क़ानून बनाने हो
दे दो उम्र कैद या फांसी भी,
बहुत है नाम मेरे अब किस-किस को तुम सजा दिलाओगे,
अरे सुनो राम मैंने कहा न था तुम मुझे मार न पाओगे ।
तुम एक को मारोगे मैं दस पैदा कर दूंगा
और अब तुम कुछ भी कर मुझको रोक न पाओगे,
हाँ अब मैं हूँ रावण मैं ही दुर्योधन अब
अपनी बहू और बेटियों को कैसे तुम बचाओगे,
मै तो हूँ धर्म गुरु मैं ही पालनहार
मेरी तुम पूजा कर बार बार मुझे भगवान बनाओगे,
आओ मै तुम्हारी किस्मत लिख दूँ
और फिर तुम अपने पूजा घर में मेरी तस्वीर लगाओगे,
अरे सुनो राम मैंने कहा न था तुम मुझे मार न पाओगे ।
सीता को था चुराया मैंने और द्रोपदी को था जीता
पर अब तो बस कभी राम नाम कभी अल्लाह का नाम लूंगा
तो सेवक तुम मेरे बन जाओगे ,
तुम तो अब बेटी का बाप बनने से भी घबराओगे
वो इसलिए नहीं कि दहेज देना होगा,
बस इसलिए कि कहीं पापा की परी
मेरा अगला शिकार न हो,
पर मैं तो तुम्हारा बाप हूँ इसलिये मुझ पे
तुम कैसे आरोप लगाओगे ?
अरे सुनो राम मैंने कहा न था तुम मुझे मार न पाओगे ।
सुनो ये गलती नही है मेरी दोष मुझे न तुम देना,
क्योंकि मेरे मरने के बाद भी तुम मुझको अपना बाप बताते हो
और मैं सोना भी चाहूँ तो बार बार मुझे तुम ही जगाते हो,
अरे तुम ही हो मेरे पालनहार पर खुद को क्यों समझाओगे ,
अरे तुम हो मूर्ख और अन्धविश्वासी भी
इसलिए फिर अपनी बेटी को मेरे चरणों में लाओगे
अभी तुम्हारी बेटी और बहन बची है
शायद इसलिए तुम मुझे फिर से भगवन बनाओगे,
अरे सुनो राम मैंने कहा न था तुम मुझे मार न पाओगे ।
मै तो हूँ अमर और निडर न भी तुम कैसे मुझको डराओगे ।
अरे सुनो राम मैंने कहा न था तुम मुझे मार न पाओगे ।