कविता : चींटी 

डॉ. सुधेश (से. नि. हिन्दी प्राध्यापक जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय) ३१४ सरल अपार्टमैन्ट्स , द्वारका , सैक्टर १० –


सरकती सरकती
चढ़ गई हिमालय
डॉ. सुधेश

कुछ दिनों बाद

कोरी चमड़ी में खाज उठी
सोचा एवरेस्ट की सैर करूँ
एक बर्फ़ीला झौंका
थप्पड़ सा लगा
चींटी  दबी दबी सोच रही
चलो हिमालय की चोटी
तक तो पहुँची
किसी और दिन देखूँगी
एवरेस्ट ।