गदहे भाई

Babulal Dahiya-

गदहे भाई बड़े खधाई दिन भर जागर प्यारा।
मुँह अंधियारे निकर गया ता बहुरा लउटत ब्यारा।।

लदी रहय पीठे मा गोनिया ढोबा पथरा ईटा।
जहां न ठेलन कय पइठारी अतरिउ खोतरी हीठा।।

मालिक भले करय दुइभाती चारा कना न डारय।
अपनव चढ़य गठरिया लादय लठिया लिहे अहारय।।

तऊ करा दिन भर तुलुआइस कबहूं हुकुम न टर त्या।
अउघट घाट होय खडबीहड हुअव कड़बड़ी मर त्या।

नेतव अब तोहरे गुन काही सब तर लगे सुनामय।
तोहरेन कस अउगल सपूत कुछ खुद का लगे बतामय।।

लागय उय दिन दूर नही सब के चिन्हबे मा अइहा।
लेय खितिर श्रमबीर चक्र दिल्ली बोल बाये जइहां।।