अहिरोरी, हरदोई : महर्षि मंगल गिरि आश्रम यज्ञ सेवा समिति अहिरोरी द्वारा आयोजित नवम् श्री रुद्रमहायज्ञ में प्रवचन करते हुए कथाव्यास श्री संजय मिश्रा ने राम-नाम का महात्म्य सुनाते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं को समझाया कि श्रीराम से विमुख होकर किसी का भी कल्याण नही हो सकता।
माता सती के प्रसंग को सुनाते हुए बताया कि एक बार भगवान शिव की प्रियतमा सती को भगवान श्रीराम पर संदेह हो गया तो परीक्षा लेने पहुंचे गयीं। प्रभु राम ने माता सती से भगवान शिव सहित उनका हाल पूछा, जिससे उनको बहुत शर्मिंदगी हुई। यह बात भगवान शिव से माता ने छुपाई और त्रिकालदर्शी भगवान शिव ने सब जान लिया। शिव ने माता को उनके इस कृत्य के त्याग दिया और कुछ समय बाद माता सती ने पिता के यज्ञ मे अपने प्राण त्याग दिए।
रामचरितमानस विवाद के परिप्रेक्ष्य में उन्होंने कहा कि आज जो राक्षसी प्रवृत्ति के लोग हैं वह पवित्र रामचरितमानस पर प्रश्नचिह्न लगाकर पवित्र ग्रंथ की प्रतियां जला रहे हैं, यह बहुत निंदनीय है। आज का समाज किस दिशा में जा रहा है? एक तरफ अयोध्याधाम में मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बन रहा है और दूसरी ओर घिनौनी मानसिकता के तुच्छ लोग; जिनको न भाषा का ज्ञान है और न ही समाज का; ऐसे लोगों का विनाश निश्चित है ।
कथा पाण्डाल में आश्रम के महंत दिव्यगिरि जी महाराज, सर्वराकार लल्ले बाबा, व्यवथापक रुद्रेश शुक्ल, महंत धरमपुरी जी महाराज श्रीदुबे जी, महंत शंकर गिरि, पवन तिवारी, रोहित तिवारी, सत्यनारायण तिवारी, कृष्णेश शुक्ला, संतोष सिंह, पूर्व प्रधान निर्भय सिंह, पूर्व प्रधान हरिकिशोर, नितिन मिश्रा, सचिन मिश्रा, श्याम चंदेल, अभिषेक मिश्रा, वीर बहादुर सिंह, सुशील शर्मा, अर्पित सैनी एवं अनेक संतजन व सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।