‘साहित्यांजलि प्रज्योदि’ की नुक्कड़ परिचर्चा ‘सोनेवाले!जागो अब’ सम्पन्न

"पर्यावरण के समस्त घटक मानव-अतिवादिता से विचलित हो रहे हैं"

इलाहाबाद के साहित्यिक इतिहास में पहली बार ‘नुक्कड़ साहित्यिक परिचर्चा’ और ‘पर्यावरण पर केन्द्रित काव्यपाठ’ का आयोजन प्रकृतिसंरक्षण-मंच ‘साहित्यांजलि प्रज्योदि’ के तत्त्वावधान में भाषाविद् डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की अध्यक्षता और शिक्षाविद् प्रो० रामकिशोर शर्मा के मुख्य आतिथ्य में दो चरणों में १२ अगस्त, २०१८ ईसवी को यातायात कार्यालय के सामने स्थित ‘भारत यादव टी-स्टाल’, इलाहाबाद पर चाय की चुस्कियाँ लेते हुए किया गया था। मूसलाधार वर्षा होती रही और परिचर्चा होती रही। प्रथम चरण के अन्तर्गत ‘सोनेवाले! जागो अब’ विषयक परिचर्चा के मुख्य वक्ता कौशाम्बी से पधारे ‘जल बचाओ-जीवन बचाओ’ के संयोजक रणविजय निषाद ने चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा, “पर्यावरण के अपमार्जक चील, गिद्ध, बाज, गौरय्या तथा कालसर्प विलुप्त होते जा रहे हैं। इस दृष्टि से अब प्रकृति और मानव के अन्तर्सम्बन्धों की समीक्षा अनिवार्य है।” उन्होंने जल के विवेकपूर्ण उपयोग और प्रबन्धन पर विस्तृत विवेचन किया।

समारोह के अध्यक्ष डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने बताया, ” पर्यावरण के समस्त घटक और उपादान मानव की अतिवादिता से विचलित हो रहे हैं और अपना प्रकोप दिखाने के लिए बाध्य हैं। मनुष्य को इसे समझते हुए, प्रकृति का बहुविध संरक्षण करना होगा।”

मुख्य अतिथि प्रो० राम किशोर शर्मा ने कहा,”पर्यावरण से आवृत मनुष्य की सत्ता है; उससे अलग उसके विनाश की सम्भावना है। हमें अपनी प्रकृति का पोषण करना होगा।”
संचालक डॉ० प्रदीप चित्रांशी ने कहा, “प्लास्टिक-उपयोग सम्पूर्ण जीव-जगत् के लिए हानिकारक है।”

पी०सी०एस० परीक्षा की तैयारी कर रहीं रोशनी शुक्ल का मत था, “हम भौतिक पर्यावरण के प्रति चिन्तित तो हैं, परन्तु हमारी उतनी ही चिन्ता ‘सांस्कृतिक पर्यावरण’ के लिए भी होनी चाहिए।” हिन्दी-प्रवक्ता डॉ० धारवेन्द्र प्रताप त्रिपाठी का मानना था, ” विद्यालयों में आरम्भ से ही पर्यावरण के प्रति विद्यार्थियों को जागरूक करना होगा।”
समारोह का आरम्भ रणविजय निषाद ने ‘प्रकृति-आराधना’ से किया।

समारोह के दूसरे चरण में ‘पर्यावरण-विषयक’ काव्य-पाठ का आयोजन किया गया, जिसमें उर्वशी उपाध्याय, कैलाशनाथ पाण्डेय, एस० पी० श्रीवास्तव, केशव सक्सेना, मुनीन्द्र श्रीवास्तव, कविता उपाध्याय, देवेश, जयशंकर मिश्र, उमेश श्रीवास्तव आदिक ने कविताएँ सुनायीं।

इस अवसर पर श्रद्धा कौशल, मीनू शर्मा, नीता यादव, चन्द्र ज्योति, श्यामनारायण मिश्र, गीतिका आदिक उपस्थित थीं। सुनील मिश्र ने आभार-ज्ञापन किया। विशेष सहयोग भारत यादव का रहा।