हाथरस के पुलिस और ज़िला-प्रशासन के विरुद्ध कठोर क़ानूनी कार्यवाही करने की ज़रूरत

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

हाथरस की गुड़िया के शव को हाथरस पुलिस और ज़िला-प्रशासन ने उसके घर के सदस्यों को बिना बताये और दिखाये मनमानी करते हुए, बेतरतीब तरीक़े से जला दिया। उसके परिवारवाले गुड़िया का चेहरा देखने और अपनी रीति-रिवाज़ से उसकी अन्त्येष्टि करना चाहते थे; परन्तु हाथरस के ज़िला-प्रशासन ने उनकी एक न सुनी और आनन-फानन में पुलिसकर्मियों के सहयोग से गुड़िया के मृत शरीर को जलवा दिया गया। यह भी तथ्य सामने आया है कि गुड़िया के पिता को उनके घर में पुलिसकर्मियों ने बन्द कर दिया था और उसके चाचा को भी अपनी भतीजी के शव से दूर रहने की चेतावनी दे दी गयी थी। यह कितनी अमानवीयता है कि जिनकी बेटी की नृशंस हत्या की गयी थी, उन्हें ही उनकी बेटी को अन्तिम बार देखने तक नहीं किया गया। ऐसे सभी घिनौने लोग एक प्रकार से कठोर दण्ड के अपराधी हैं। इसके लिए हाथरस का पुलिस-अधीक्षक, ज़िलाधिकारी, उप-ज़िलाधिकारी आदिक के विरुद्व विधिक कार्यवाही करने की आवश्यकता है।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ३० सितम्बर, २०२० ईसवी।)
★ चित्र-विवरण– श्मशानघाट पर— उधर गुड़िया का शव जलाया जा रहा था, इधर इस बेशर्म पुलिसकर्मी की हँसी फूट रही थी। काश! इसके बीवी-बच्चों को कफ़न नसीब न हो और यह भी उन्हें देखने के लिए तरस जाये।